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Mahakal Temple News: बाबा महाकाल के दरबार में भावुक हुईं वसुंधरा राजे, उज्जैन से बताया सदियों पुराना नाता और आस्था का गहरा संबंध

By Dainik Jan Times

Published on: February 25, 2026

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Mahakal Temple News: धार्मिक नगरी उज्जैन से जुड़ी एक खास खबर सामने आई है जिसने श्रद्धालुओं के दिल को छू लिया है। ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन करने पहुंचीं वसुंधरा राजे ने बाबा महाकाल के प्रति अपनी गहरी आस्था और जुड़ाव को याद किया। उन्होंने कहा कि उज्जैन से उनका संबंध आज का नहीं बल्कि सदियों पुराना है और यहां की पवित्र धरती से उनका भावनात्मक रिश्ता रहा है।

उज्जैन से जुड़ी निजी यादें और आस्था का रिश्ता

वसुंधरा राजे ने मीडिया से चर्चा करते हुए बताया कि सूर्य मंदिर के पास उनका आवास हुआ करता था और वे प्रतिदिन बाबा महाकाल के दर्शन करने जाया करती थीं। इस मंदिर से उनका गहरा लगाव रहा है और आज भी समय समय पर वे यहां आकर आशीर्वाद लेती हैं। उन्होंने कहा कि बाबा महाकाल का आशीर्वाद हमेशा उनके साथ रहा है और जीवन के हर सुख दुख में उन्होंने संरक्षण दिया है। उनके शब्दों में आस्था और श्रद्धा साफ झलक रही थी।

उन्होंने यह भी कहा कि राजस्थान के लोग भी बाबा महाकाल में गहरी श्रद्धा रखते हैं और बड़ी संख्या में उज्जैन आकर दर्शन करते हैं। पुजारी परिवार से उनका पारिवारिक संबंध भी रहा है जिससे यह जुड़ाव और भी मजबूत हो जाता है।

मंदिर के विकास और भव्य स्वरूप की सराहना

वसुंधरा राजे ने मंदिर के सौंदर्यीकरण और विकास कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि सरकार ने जनता की भावनाओं को ध्यान में रखकर भव्य परिकल्पना की थी। उसी का परिणाम है कि आज महाकाल मंदिर दिव्य और आकर्षक स्वरूप में दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि अब श्रद्धालुओं को दर्शन के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था का सामना नहीं करना पड़ता और व्यवस्थाएं पहले से कहीं बेहतर हुई हैं।

दर्शन के दौरान उन्होंने बाबा महाकाल के समक्ष विधिवत पूजा अर्चना की। इसके बाद भगवान श्री वीरभद्र जी के दर्शन किए और श्री महाकालेश्वर ध्वज चल समारोह में निकलने वाले ध्वज का पूजन भी किया। मंदिर प्रबंध समिति की ओर से सहायक प्रशासक मूलचंद जूनवाल और सहायक प्रशासक प्रतीक द्विवेदी ने उनका स्वागत और सत्कार किया।

उज्जैन की इस यात्रा ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि बाबा महाकाल के दरबार में आने वाला हर भक्त भावनाओं से भर जाता है। आस्था और श्रद्धा की यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है और आगे भी इसी तरह जारी रहेगी।

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