आज के समय में सोशल मीडिया पर कोई भी खबर तेजी से फैलती है और कई बार अधूरी जानकारी लोगों को भ्रमित भी कर देती है ऐसा ही एक मामला इंदौर उज्जैन सिक्सलेन सड़क निर्माण को लेकर सामने आया जहां एक वीडियो वायरल होते ही लोगों के मन में सड़क की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ गई
वायरल वीडियो ने उठाए बड़े सवाल
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में यह दावा किया गया कि सड़क के ड्रेनेज निर्माण में लोहे की जगह प्लास्टिक के सरियों का इस्तेमाल किया जा रहा है इस दावे ने लोगों को चौंका दिया और कई तरह की शंकाएं पैदा हो गई लोगों को लगा कि निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग हो रहा है जिससे भविष्य में सड़क की मजबूती प्रभावित हो सकती है
जांच में सामने आई सच्चाई
जब यह मामला तेजी से फैलने लगा तो विभागीय अधिकारियों और विशेषज्ञों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर जांच की जांच के बाद साफ हुआ कि वीडियो में किया गया दावा पूरी तरह गलत और भ्रामक था निर्माण में प्लास्टिक नहीं बल्कि एक आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है जिसे ग्लास फाइबर रीइनफोर्स्ड पॉलिमर यानी GFRP कहा जाता है
GFRP क्या है और क्यों है खास
GFRP एक उन्नत निर्माण सामग्री है जिसे कांच के फाइबर और पॉलिमर रेजिन से बनाया जाता है इसे फाइबर सरिया भी कहा जाता है इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पारंपरिक स्टील के मुकाबले ज्यादा हल्का और मजबूत होता है साथ ही इसमें जंग लगने का खतरा नहीं होता जिससे इसकी उम्र काफी बढ़ जाती है
स्टील से भी बेहतर क्यों माना जा रहा है
विशेषज्ञों के अनुसार GFRP सरिये कई मामलों में स्टील से बेहतर साबित हो रहे हैं यह न केवल मजबूत होते हैं बल्कि लंबे समय तक टिकाऊ भी रहते हैं इन पर मौसम का असर कम होता है और यह खराब नहीं होते यही कारण है कि अब आधुनिक निर्माण परियोजनाओं में इनका उपयोग तेजी से बढ़ रहा है
दुनिया भर में बढ़ रहा है उपयोग
आज के समय में GFRP का इस्तेमाल सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं है बल्कि इसका उपयोग पुल फ्लाईओवर समुद्री इलाकों पानी की टंकियों और मेट्रो जैसी बड़ी परियोजनाओं में भी किया जा रहा है इसकी मजबूती और हल्केपन के कारण इंजीनियर इसे भविष्य की तकनीक मान रहे हैं
मानकों पर पूरी तरह खरा उतरता है यह मटेरियल
भारतीय सड़क निर्माण के मानक तय करने वाली संस्था इंडियन रोड्स कांग्रेस ने भी GFRP के उपयोग को सुरक्षित और मानक के अनुरूप बताया है कोड 137 2022 के तहत इसे सड़क निर्माण के लिए उपयुक्त माना गया है अधिकारियों का कहना है कि इस तकनीक से निर्माण की गुणवत्ता कम नहीं बल्कि और बेहतर होती है
लोगों को समझना होगा सच और अफवाह का फर्क
यह घटना हमें एक महत्वपूर्ण सीख देती है कि सोशल मीडिया पर देखी गई हर जानकारी सच नहीं होती किसी भी खबर पर विश्वास करने से पहले उसकी पुष्टि करना जरूरी है क्योंकि गलत जानकारी न केवल भ्रम फैलाती है बल्कि अच्छे काम पर भी सवाल खड़े कर देती है
इंदौर उज्जैन सिक्सलेन को लेकर जो वीडियो वायरल हुआ वह पूरी तरह भ्रामक निकला हकीकत यह है कि सड़क निर्माण में आधुनिक और मजबूत तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है जो आने वाले समय में बेहतर और टिकाऊ इंफ्रास्ट्रक्चर की दिशा में एक बड़ा कदम है

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