मध्य प्रदेश में धार्मिक नगरी उज्जैन तेजी से विकास की ओर बढ़ रही है, जहां उज्जैन घाट निर्माण मोहन यादव के तहत बड़े स्तर पर काम जारी है। मुख्यमंत्री 0 ने क्षिप्रा नदी पर बन रहे घाटों और पुल का निरीक्षण कर अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि श्रद्धालुओं की सुविधा में कोई कमी नहीं होनी चाहिए। आगामी सिंहस्थ महापर्व 2028 को ध्यान में रखते हुए इन घाटों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जा रहा है, जिससे लाखों श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव मिल सके। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने घाटों की गुणवत्ता, पहुंच व्यवस्था और सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने को कहा।
श्रद्धालुओं की सुविधा सर्वोपरि
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि घाटों के लगभग 200 मीटर क्षेत्र में वस्त्र बदलने की समुचित व्यवस्था की जाए और सुविधाजनक स्थानों पर स्वच्छ टॉयलेट बनाए जाएं। उज्जैन घाट निर्माण मोहन यादव योजना के तहत प्रमुख घाटों पर हर 200 मीटर की दूरी पर सुविधा घर विकसित करने की बात कही गई, ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
आसान पहुंच के लिए बेहतर व्यवस्था
घाटों तक पहुंच को सरल बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने लगभग 500 मीटर की दूरी पर सीढ़ियां और अन्य मार्ग तैयार करने के निर्देश दिए। इससे श्रद्धालु आसानी से मुख्य घाटों तक पहुंच सकेंगे। उज्जैन घाट निर्माण मोहन यादव पहल के अंतर्गत यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि भीड़ के दौरान भी आवाजाही में कोई बाधा न हो।
पुल निर्माण से बढ़ेगी कनेक्टिविटी
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने श्री सिद्धवट और श्री अंगारेश्वर मंदिर के बीच बन रहे पुल का भी जायजा लिया। अधिकारियों के अनुसार, इस पुल के बन जाने से दोनों प्रमुख धार्मिक स्थलों के बीच आवागमन काफी आसान हो जाएगा। उज्जैन घाट निर्माण मोहन यादव परियोजना में यह पुल एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगा।
आधुनिक घाटों का निर्माण कार्य
घाटों को लगभग 5 मीटर चौड़ा बनाया जा रहा है, जिससे श्रद्धालुओं को स्नान, बैठने और आवागमन की पर्याप्त सुविधा मिल सके। साथ ही बैठने की व्यवस्था और अन्य जरूरी सुविधाओं को भी विकसित किया जा रहा है। उज्जैन घाट निर्माण मोहन यादव के इस प्रयास से उज्जैन को एक विश्वस्तरीय धार्मिक स्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

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