आज हम आपको मध्य प्रदेश के रतलाम से जुड़ी एक ऐसी खबर बताने जा रहे हैं जिसने पूरे शहर को हैरान कर दिया है। आवारा कुत्तों की नसबंदी के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा किया गया लेकिन जब सच्चाई सामने आई तो आंकड़े चौंकाने वाले निकले। अब यह मामला लोकायुक्त तक पहुंच गया है और जांच शुरू हो चुकी है।
कागजों में 33 हजार नसबंदी, जमीन पर सिर्फ 2200 कुत्ते
मध्य प्रदेश के रतलाम में नगर निगम ने साल 2022 से मई 2025 तक कुल 33 हजार 630 आवारा कुत्तों की नसबंदी करने का दावा किया। निगम के रिकॉर्ड के मुताबिक इस काम के लिए निजी फर्मों को करीब 2 करोड़ 58 लाख रुपये का भुगतान भी किया गया। दावा यह था कि शहर में आवारा कुत्तों की संख्या को नियंत्रित करने के लिए बड़ा अभियान चलाया गया।
लेकिन जब शहर में डॉग बाइट की घटनाएं कम नहीं हुईं और सड़कों पर कुत्तों की संख्या जस की तस रही तो सवाल उठने लगे। कांग्रेस पार्षद भावना हितेश बेमाल ने इस पूरे मामले को परिषद में उठाया। जब उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो उन्होंने लोकायुक्त में शिकायत दर्ज कराई।
इसके बाद जब नगर निगम ने खुद सर्वे कराया तो सिर्फ 2200 नसबंदी वाले कुत्ते ही पाए गए। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि बाकी 31 हजार से ज्यादा कुत्तों की नसबंदी आखिर कहां हुई। क्या यह पूरा खेल सिर्फ कागजों में ही चलता रहा। अब लोकायुक्त को इस बात की आशंका है कि अधिकारियों और निजी फर्मों की मिलीभगत से फर्जी आंकड़े दिखाकर करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया।
कम दरों पर भुगतान ने बढ़ाए शक
जांच में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई। सरकारी गाइडलाइन के अनुसार एक कुत्ते की नसबंदी पर करीब 1650 रुपये का खर्च आता है। इसमें कुत्ते को पकड़ना सर्जरी करना दवाएं देना और देखभाल शामिल होती है। लेकिन नगर निगम ने निजी फर्मों को प्रति कुत्ता 636 रुपये और 786 रुपये की दर से भुगतान किया।
जानकारों का कहना है कि एक सामान्य नसबंदी किट की कीमत ही करीब 845 रुपये होती है। ऐसे में इतनी कम राशि में पूरी प्रक्रिया कैसे संभव है। यही वजह है कि भुगतान की दरों ने भी भ्रष्टाचार के शक को और गहरा कर दिया है।
मामला सामने आने के बाद रतलाम के महापौर प्रहलाद पटेल ने कहा है कि उन्हें हाल ही में इस शिकायत की जानकारी मिली है। उन्होंने साफ कहा है कि लोकायुक्त में मामला गया है तो जांच होगी और अगर कोई अधिकारी दोषी पाया जाता है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी।
वहीं पार्षद भावना बेमाल का कहना है कि वे लंबे समय से इस मुद्दे को उठा रही थीं। उनका आरोप है कि यह जनता के पैसों की खुली लूट है जबकि शहरवासी रोजाना आवारा कुत्तों के डर में जी रहे हैं। अब शहर की निगाहें लोकायुक्त जांच पर टिकी हैं। अगर आरोप सही साबित होते हैं तो यह प्रदेश के बड़े घोटालों में से एक माना जाएगा।

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