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नर्मदापुरम बासमती चावल संकट खाड़ी देशों में युद्ध का असर निर्यात ठप करोड़ों का माल बंदरगाहों में फंसा

By Dainik Jan Times

Published on: March 7, 2026

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Narmadapuram Basmati Rice Export Crisis

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Narmadapuram Basmati Rice Export Crisis: मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले से एक बड़ी चिंता वाली खबर सामने आ रही है। यहां का मशहूर बासमती चावल कारोबार इन दिनों गहरे संकट से गुजर रहा है। हजारों किलोमीटर दूर चल रहे अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर अब सीधे इस जिले के व्यापार पर दिखाई देने लगा है। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते युद्ध जैसे हालात के कारण समुद्री रास्ते प्रभावित हुए हैं और इसका सीधा असर नर्मदापुरम के चावल निर्यात पर पड़ा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि विदेशों में भेजा जाने वाला चावल फिलहाल पूरी तरह रुक गया है और इससे राइस मिल उद्योग पर भारी दबाव बन गया है।

निर्यात रुकने से राइस मिल उद्योग पर बढ़ा आर्थिक दबाव

पिछले लगभग छह दिनों से निर्यात प्रक्रिया पूरी तरह थम गई है। इसका सबसे बड़ा असर इटारसी और पिपरिया क्षेत्र की राइस मिलों पर पड़ रहा है। यहां से तैयार होकर बंदरगाहों तक पहुंचा चावल अब आगे नहीं बढ़ पा रहा है। कई खेप समुद्र में जहाजों में अटकी हुई हैं जबकि कई ट्रक बंदरगाहों पर ही खड़े रह गए हैं।

इस स्थिति के कारण मिल संचालकों के सामने गंभीर आर्थिक दबाव खड़ा हो गया है। गोदाम तेजी से भरते जा रहे हैं और तैयार माल का उठाव बंद हो गया है। उद्योग से जुड़े लोग अब चिंतित हैं कि यदि यह स्थिति लंबी चली तो नुकसान बहुत बड़ा हो सकता है।

रोजाना हजारों टन चावल जाता था विदेश

सामान्य दिनों में नर्मदापुरम जिले से बड़ी मात्रा में बासमती चावल खाड़ी देशों में भेजा जाता है। केवल इटारसी और आसपास के कारखानों से ही हर दिन लगभग बीस से पच्चीस टन बासमती चावल गल्फ देशों के लिए रवाना होता था। पूरे जिले की बात करें तो रोज करीब बारह सौ टन चावल का निर्यात होता था।

लेकिन समुद्री रास्तों पर बढ़ते तनाव और संघर्ष के कारण अचानक निर्यात रुक गया है। इस वजह से स्थानीय व्यापारियों के सामने बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

खाड़ी देशों में नर्मदापुरम के चावल की बड़ी पहचान

नर्मदापुरम का बासमती चावल खाड़ी देशों में अपनी खुशबू और स्वाद के कारण बहुत प्रसिद्ध है। इराक जॉर्डन कुवैत और दुबई जैसे देशों के बड़े होटल और रेस्टोरेंट में इसी चावल का उपयोग किया जाता है। यहां तक कि कई शाही भोज और खास बिरयानी में भी इसी इलाके का बासमती चावल पसंद किया जाता है।

जिले का लगभग साठ प्रतिशत चावल इन्हीं देशों में भेजा जाता है। लेकिन मौजूदा हालात में बड़ी मात्रा में चावल समुद्री रास्तों और बंदरगाहों पर अटका हुआ है जिससे पूरा कारोबार प्रभावित हो गया है।

किसानों मजदूरों और व्यापारियों की बढ़ी चिंता

इस संकट का असर केवल व्यापारियों तक सीमित नहीं है। किसान और मजदूर भी इससे सीधे प्रभावित हो रहे हैं। नर्मदापुरम के चावल कारोबारी पंकज अग्रवाल के अनुसार जिले के निर्यातकों का करोड़ों रुपये का माल बंदरगाहों और समुद्री रास्तों में फंसा हुआ है।

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कई ट्रक जो फैक्ट्रियों से बंदरगाहों के लिए भेजे गए थे उन्हें वापस लौटना पड़ा है। गोदाम पहले से ही भरे हुए हैं और अब नई प्रोसेसिंग भी रोकनी पड़ रही है। इसका सीधा असर राइस मिलों में काम करने वाले मजदूरों पर पड़ रहा है क्योंकि उनके सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। साथ ही मंडियों में धान के दाम भी गिरने लगे हैं जिससे किसानों की चिंता और बढ़ गई है।

लंबे समय तक संकट रहा तो उद्योग पर गहरा असर

कारोबारियों का मानना है कि यदि आने वाले दस से पंद्रह दिनों तक यही स्थिति बनी रहती है तो नर्मदापुरम का बासमती चावल उद्योग गंभीर आर्थिक संकट में फंस सकता है। बासमती सेला पंद्रह सौ नौ ग्यारह सौ इक्कीस सुगंधा और शरबती जैसी किस्मों की खाड़ी देशों में काफी मांग रहती है।

लेकिन युद्ध जैसे हालात के कारण इन किस्मों की खेप बंदरगाहों और समुद्र में अटकी हुई है। इससे साफ दिखाई देता है कि दुनिया के किसी भी कोने में होने वाला संघर्ष अब सीधे किसानों मजदूरों और स्थानीय व्यापारियों की आजीविका को प्रभावित कर सकता है।

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