वित्त वर्ष 2026 27 के लिए राज्य सरकार ने स्वास्थ्य विभाग के लिए 23747 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब जिला और ब्लॉक स्तर पर बेहतर इलाज की मांग लगातार बढ़ रही है। कुल राज्य बजट 438317 करोड़ रुपये रखा गया है और उसमें स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना सरकार की बड़ी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
23747 करोड़ से बदलेगा अस्पतालों का ढांचा
वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने बजट भाषण में साफ कहा कि चिकित्सा शिक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को साथ लेकर आगे बढ़ा जाएगा। सरकार का फोकस जिला स्तर के अस्पतालों की क्षमता बढ़ाने पर है ताकि मरीजों को बड़े शहरों की ओर कम जाना पड़े। अभी प्रदेश में 55 जिला चिकित्सालय 158 सिविल चिकित्सालय 348 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र 1442 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 10256 उप स्वास्थ्य केंद्र संचालित हैं। इन संस्थानों में कुल 48 हजार बिस्तरों की उपलब्धता है। सरकार का कहना है कि इस संख्या को चरणबद्ध तरीके से और बढ़ाया जाएगा जिससे रेफरल का दबाव कम हो सके।
तीन नए जिलों में बन रहे जिला अस्पताल
नए जिलों मैहर मऊगंज और पांढुर्णा में जिला चिकित्सालयों का निर्माण कार्य जारी है। इन अस्पतालों के शुरू होने के बाद स्थानीय लोगों को इलाज के लिए दूर शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इससे समय की बचत होगी और गंभीर मरीजों को तुरंत इलाज मिल सकेगा। सरकार ने डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार का भी जिक्र किया है और दावा किया है कि मध्य प्रदेश इस क्षेत्र में अग्रणी राज्यों में शामिल है।
3 जिलों में अनुबंध 9 जिलों में मेडिकल कॉलेज पर काम
सरकार निजी सहभागिता मॉडल के जरिए नए मेडिकल कॉलेज खोलने की दिशा में आगे बढ़ रही है। धार बैतूल और पन्ना में नए मेडिकल कॉलेजों के लिए अनुबंध हो चुके हैं। इसके अलावा भिंड मुरैना खरगौन अशोकनगर गुना बालाघाट टीकमगढ़ सीधी और शाजापुर में कॉलेज निर्माण का काम शुरू हो चुका है। इन संस्थानों के शुरू होने से चिकित्सा शिक्षा की सीटें बढ़ेंगी और विशेषज्ञ डॉक्टर जिला स्तर पर उपलब्ध हो सकेंगे। इससे इलाज की गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
सरकार ने 8 नए आयुर्वेद महाविद्यालय सह चिकित्सालय स्थापित करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। इससे पारंपरिक चिकित्सा पद्धति को संस्थागत मजबूती मिलेगी और छात्रों के लिए नए अवसर खुलेंगे।
3850 पदों पर भर्ती से मिलेगी राहत
स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूती के लिए मानव संसाधन अहम है। बजट में लोक स्वास्थ्य संवर्ग में चिकित्सकों और नर्सिंग अधिकारियों के 3850 पदों पर भर्ती का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा 1256 पदों पर भर्ती प्रक्रिया पहले से जारी है। सरकार का मानना है कि नियुक्तियों के बाद प्राथमिक और सामुदायिक स्तर पर सेवाएं और बेहतर होंगी।
प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना की प्रगति का भी उल्लेख किया गया। प्रदेश में 4 करोड़ 46 लाख से अधिक कार्ड जारी किए जा चुके हैं। इससे बड़ी आबादी सरकारी स्वास्थ्य बीमा के दायरे में आ चुकी है। अब चुनौती यह होगी कि इन लाभार्थियों को समय पर गुणवत्तापूर्ण अस्पताल सेवाएं मिलें और दावों का निपटारा प्रभावी तरीके से हो।
कुल मिलाकर 23747 करोड़ रुपये का प्रावधान यह संकेत देता है कि मध्य प्रदेश सरकार बुनियादी ढांचे के विस्तार चिकित्सा शिक्षा में निवेश भर्ती प्रक्रिया और बीमा कवरेज को एक साथ आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। आने वाले समय में असली असर जिला अस्पतालों की क्षमता मेडिकल कॉलेज परियोजनाओं की गति और नई नियुक्तियों की रफ्तार से ही साफ होगा।

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