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एमपी में आशा कार्यकर्ता और संविदा कर्मचारियों के लिए बड़ा नियम लागू अब बायोमेट्रिक से मिलेगा मानदेय

By Dainik Jan Times

Published on: March 16, 2026

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आशा कार्यकर्ता

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मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य विभाग से जुड़े हजारों कर्मचारियों के लिए एक बड़ा बदलाव सामने आया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन यानी एनएचएम मध्यप्रदेश ने संविदा कर्मचारियों आशा कार्यकर्ताओं और आशा पर्यवेक्षकों के मानदेय भुगतान की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करने का फैसला लिया है। अब कर्मचारियों को मानदेय प्राप्त करने के लिए आधार आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण अनिवार्य करना होगा। इस फैसले के बाद पूरे प्रदेश में काम कर रहे हजारों कर्मचारियों की भुगतान प्रणाली पूरी तरह बदलने वाली है। सरकार का कहना है कि इस नई व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ेगी और किसी भी प्रकार की फर्जी उपस्थिति या गलत भुगतान पर रोक लगेगी।

1 अप्रैल 2026 से पूरे प्रदेश में लागू होगा नया नियम

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन मध्यप्रदेश ने स्पष्ट कर दिया है कि नई बायोमेट्रिक व्यवस्था 1 अप्रैल 2026 से पूरे प्रदेश में अनिवार्य रूप से लागू कर दी जाएगी। इसका मतलब यह है कि अब कर्मचारियों को अपना अंगूठा लगाकर बायोमेट्रिक सत्यापन करना होगा। जब तक यह सत्यापन नहीं होगा तब तक भुगतान की जानकारी कोषालय तक नहीं भेजी जाएगी और मानदेय जारी नहीं किया जाएगा।

सरकार का उद्देश्य यह है कि भुगतान की पूरी प्रक्रिया डिजिटल और पारदर्शी बने ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी या गलत भुगतान की संभावना समाप्त हो सके।

25 मार्च तक पूरा करना होगा पंजीकरण

एनएचएम ने इस नई व्यवस्था को लागू करने के लिए एक निश्चित समयसीमा भी तय की है। विभाग ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिया है कि 25 मार्च 2026 तक सभी संबंधित कर्मचारियों का पंजीकरण पूरा कर लिया जाए।

इसके लिए जिलों और ब्लॉकों में विशेष शिविर लगाए जा सकते हैं ताकि आशा कार्यकर्ता और संविदा कर्मचारी आसानी से अपना पंजीकरण करवा सकें। विभाग का कहना है कि यदि समय पर पंजीकरण नहीं हुआ तो अप्रैल से मानदेय भुगतान में समस्या सकती है।

एसएनए स्पर्श पोर्टल पर करना होगा बायोमेट्रिक सत्यापन

नई व्यवस्था के तहत सभी कर्मचारियों को एसएनए स्पर्श पोर्टल पर पंजीकरण करना होगा। इसके लिए आधार आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण की विशेष एप्लीकेशन तैयार की गई है।

कर्मचारियों को इस पोर्टल के माध्यम से अपना बायोमेट्रिक सत्यापन कराना होगा। सत्यापन के बाद ही भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और मानदेय की राशि कोषालय से जारी की जाएगी। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने क्षेत्रों में कर्मचारियों को इस प्रक्रिया के बारे में जागरूक करें और समय पर पंजीकरण सुनिश्चित करें।

प्रदेश में हजारों कर्मचारी इस व्यवस्था से जुड़े

मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत बड़ी संख्या में कर्मचारी कार्य कर रहे हैं। प्रदेश में लगभग 80 हजार आशा कार्यकर्ता काम कर रही हैं। इसके अलावा करीब 30 हजार संविदा कर्मचारी भी स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े हुए हैं।

इसके साथ ही 25 से 30 हजार संविदा और आउटसोर्स कर्मचारी भी समय समय पर इस व्यवस्था के अंतर्गत कार्य करते हैं। ऐसे में यह नया नियम लाखों लोगों की कार्यप्रणाली और भुगतान व्यवस्था को प्रभावित करने वाला है।

फर्जी उपस्थिति के मामलों के बाद लिया गया फैसला

पिछले कुछ महीनों में भोपाल सहित कई जिलों में फर्जी पहचान के जरिए ऐप में उपस्थिति दर्ज कराने के मामले सामने आए थे। कई कर्मचारियों की उपस्थिति सिस्टम में दर्ज दिखाई दी जबकि वे वास्तव में कार्यस्थल पर मौजूद नहीं थे।

इन मामलों के सामने आने के बाद सरकार ने व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए बायोमेट्रिक प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया। विभाग का मानना है कि बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण से फर्जी उपस्थिति और गलत भुगतान की समस्या खत्म हो जाएगी।

अधिकारियों को दिए गए सख्त निर्देश

एनएचएम के वित्त संचालक वीरभद्र शर्मा ने बताया कि भारत सरकार के निर्देशों के अनुसार अब सभी संविदा स्टाफ आशा कार्यकर्ता और हितग्राहियों का भुगतान आधार आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के जरिए ही किया जाएगा।

उन्होंने यह भी कहा कि सभी संबंधित अधिकारियों को 25 मार्च तक कर्मचारियों का पंजीकरण सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं ताकि अप्रैल से नई व्यवस्था बिना किसी बाधा के लागू की जा सके।

मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों के लिए यह फैसला काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार का उद्देश्य भुगतान प्रणाली को पारदर्शी बनाना और फर्जी उपस्थिति पर पूरी तरह रोक लगाना है। हालांकि आने वाले समय में यह देखना भी दिलचस्प होगा कि नई व्यवस्था से कर्मचारियों को कितनी सुविधा मिलती है और क्या इससे भुगतान प्रक्रिया वास्तव में तेज और साफ बन पाती है।

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