MP NEWS: इंदौर से आई एक दुखद खबर ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। शहर में सीवरेज चैंबर की सफाई के दौरान दो सफाईकर्मियों की दम घुटने से मौत हो गई। यह घटना न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है बल्कि उन परिवारों के दर्द को भी सामने लाती है जिनके घर का सहारा अचानक छिन गया।
सीवर चैंबर में दम घुटने से गई जान
मामला उस समय सामने आया जब नगर निगम के दो कर्मचारी देवी अहिल्याबाई होलकर फल सब्जी मंडी के सामने सीवरेज लाइन के एक चैंबर की सफाई कर रहे थे। अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त सुमित केरकेट्टा के अनुसार सफाई के दौरान सीवर सक्शन मशीन का एक पाइप टूटकर चैंबर में गिर गया। पाइप को निकालने के लिए एक कर्मचारी नीचे उतरा लेकिन जहरीली गैस के प्रभाव से वह बेहोश हो गया। उसे बचाने के लिए दूसरा कर्मचारी भी चैंबर में उतरा और वह भी बेहोश हो गया।
चैंबर में मौजूद जहरीली गैस के कारण दोनों का दम घुट गया और उनकी मौत हो गई। राज्य आपदा मोचन बल की टीम ने दोनों शवों को बाहर निकाला और पोस्टमॉर्टम के लिए अस्पताल भेजा गया। इस घटना के बाद पूरे इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल बन गया।
मृतकों की पहचान और प्रत्यक्षदर्शी का आरोप
पुलिस उपायुक्त श्रीकृष्ण लालचंदानी ने बताया कि मृतकों की पहचान करण यादव और अजय डोडी के रूप में हुई है। प्रत्यक्षदर्शी अमित रजक ने दावा किया कि दोनों कर्मचारी बिना सुरक्षा उपकरणों के चैंबर में उतरे थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि घटना के करीब दो घंटे बाद तक पुलिस और एम्बुलेंस मौके पर नहीं पहुंची थी और स्थानीय लोगों ने खुद उन्हें बाहर निकालने की कोशिश की।
यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर इतनी खतरनाक जगह पर बिना पर्याप्त सुरक्षा के कर्मचारियों को क्यों उतारा गया। सीवर में जहरीली गैस का खतरा हमेशा बना रहता है फिर भी सुरक्षा मानकों की अनदेखी गंभीर चिंता का विषय है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किया मुआवजे का ऐलान
इस दर्दनाक घटना के बाद मोहन यादव ने दोनों मृत सफाईकर्मियों के परिजनों को 30 30 लाख रुपये की सहायता राशि देने के निर्देश दिए हैं। इंदौर नगर निगम द्वारा जारी विज्ञप्ति में इसकी जानकारी दी गई। मुख्यमंत्री ने संवेदना व्यक्त करते हुए परिवारों को हर संभव मदद का भरोसा दिलाया है।
मुआवजे की घोषणा से परिवारों को आर्थिक सहारा जरूर मिलेगा लेकिन जिन घरों का बेटा या पिता चला गया उसकी कमी कभी पूरी नहीं हो सकती। यह हादसा एक बार फिर याद दिलाता है कि सफाईकर्मी हमारे शहर को स्वच्छ रखने के लिए अपनी जान जोखिम में डालते हैं और उनके लिए पुख्ता सुरक्षा इंतजाम होना बेहद जरूरी है।
प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे सवाल
घटना ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं थे या उनका उपयोग नहीं किया गया तो इसकी जिम्मेदारी तय होना जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि सीवर सफाई के दौरान आधुनिक मशीनों और गैस डिटेक्शन सिस्टम का इस्तेमाल अनिवार्य किया जाना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न दोहराई जाएं।
इंदौर जैसे बड़े शहर में इस तरह की घटना का सामने आना चिंताजनक है। जरूरत है कि प्रशासन इस मामले की निष्पक्ष जांच करे और दोषियों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करे ताकि मृतकों को न्याय मिल सके।

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