मध्य प्रदेश से एक ऐसी खबर सामने आई है जो आने वाले समय में पूरे मालवा क्षेत्र की तस्वीर बदल सकती है। राज्य सरकार ने इंदौर और पीथमपुर को जोड़ने वाले 21 किलोमीटर लंबे आठ लेन आर्थिक कॉरिडोर को मंजूरी दे दी है। यह फैसला मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर करीब 2360 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है और इसे प्रदेश के औद्योगिक विकास की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
इंदौर से पीथमपुर तक नई रफ्तार
यह कॉरिडोर केवल एक सड़क परियोजना नहीं है बल्कि यह मालवा के आर्थिक भविष्य को नई दिशा देने वाली योजना है। यह मार्ग इंदौर से शुरू होकर पीथमपुर के एबी रोड तक जाएगा। खास बात यह है कि इस कॉरिडोर को इंदौर एयरपोर्ट से भी जोड़ा जाएगा जिससे औद्योगिक क्षेत्र की कनेक्टिविटी और मजबूत होगी।
जब सड़कें मजबूत होती हैं तो व्यापार तेज होता है और जब व्यापार बढ़ता है तो रोजगार के अवसर भी बढ़ते हैं। यही सोच इस परियोजना के पीछे काम कर रही है। सरकार का मानना है कि इससे उद्योगों को बेहतर परिवहन सुविधा मिलेगी और निवेशकों का भरोसा भी बढ़ेगा।
लैंड पूलिंग मॉडल से किसानों की भागीदारी
इस परियोजना की सबसे खास बात इसका लैंड पूलिंग मॉडल है। कॉरिडोर के निर्माण के लिए 17 गांवों के किसानों से लगभग 3200 एकड़ जमीन ली जाएगी। लेकिन यहां किसानों को केवल मुआवजा नहीं दिया जाएगा बल्कि उन्हें विकसित जमीन का 60 प्रतिशत हिस्सा वापस मिलेगा।
लैंड पूलिंग कानून में 50 प्रतिशत जमीन लौटाने का प्रावधान है लेकिन मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर इसे बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दिया गया है। यही वजह है कि इस योजना को किसानों का व्यापक समर्थन मिल रहा है।
कॉरिडोर के दोनों ओर 3 से 5 किलोमीटर चौड़ा औद्योगिक जोन विकसित किया जाएगा। इसमें शिवखेड़ा नरलाय सिन्दोड़ा बिसनावदा नैनोद भैंसलाय और धन्नड़ समेत कुल 17 गांवों की जमीन शामिल होगी।
रोजगार और निवेश के नए अवसर
किसानों को जो विकसित जमीन वापस मिलेगी उस पर वे खुद उद्योग स्थापित कर सकते हैं या व्यावसायिक उपयोग के लिए बेच सकते हैं। इससे वे केवल जमीन देने वाले नहीं बल्कि विकास के साझेदार बनेंगे।
इस औद्योगिक जोन में हाउसिंग स्कीम शॉपिंग कॉम्प्लेक्स मॉल और ऑफिस एरिया विकसित किए जाएंगे। किसान और बिल्डर मिलकर कॉलोनियां भी तैयार कर सकेंगे। इससे स्थानीय स्तर पर हजारों रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है।
सरकार को उम्मीद है कि यह कॉरिडोर मालवा क्षेत्र को नई पहचान देगा और इंदौर से पीथमपुर के बीच यात्रा का समय भी काफी कम करेगा। तेज कनेक्टिविटी से उद्योगों को बड़ा फायदा होगा और क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां तेजी से बढ़ेंगी।
यह परियोजना आने वाले वर्षों में मध्य प्रदेश को औद्योगिक मानचित्र पर और मजबूत स्थिति में खड़ा कर सकती है।

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