States Madhya Pradesh Ujjain News Agriculture Aaj ka rashifal Country and World Life Style

इंदौर एमवाय अस्पताल में एचआईवी वार्ड के पास बिल्लियों की मौजूदगी से बढ़ी चिंता दवा कक्ष और ओपीडी की स्वच्छता पर सवाल

By Dainik Jan Times

Published on: February 20, 2026

Follow Us

---Advertisement---

आज हम आपको इंदौर के एमवाय अस्पताल से जुड़ी एक ऐसी खबर बता रहे हैं जिसने एक बार फिर अस्पताल की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला केवल सफाई तक सीमित नहीं है बल्कि संक्रमण नियंत्रण और मरीजों की सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है।

ओपीडी और एचआईवी वार्ड के आसपास बिल्लियों की आवाजाही

इंदौर स्थित एमवाय अस्पताल में ओपीडी एआरटी काउंसलिंग सेंटर और एचआईवी संक्रमण वार्ड के आसपास बिल्लियों की मौजूदगी सामने आई है। जानकारी के अनुसार ओपीडी क्षेत्र में एक बिल्ली द्वारा बच्चों को जन्म देने की बात भी सामने आई। इस घटनाक्रम ने अस्पताल की स्वच्छता और निगरानी व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

बताया जा रहा है कि संवेदनशील एचआईवी संक्रमण वार्ड के आसपास बिल्लियां खुले में घूमती देखी गईं। यह वही क्षेत्र है जहां कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले मरीज इलाज के लिए आते हैं। ऐसे में जानवरों की आवाजाही संक्रमण के खतरे को बढ़ा सकती है।

दवा कक्ष में गंदगी से बढ़ी चिंता

सूत्रों के मुताबिक एचआईवी मरीजों के लिए बनाए गए मेडिसिन कक्ष में भी बिल्लियों के कारण गंदगी फैलने की शिकायत मिली है। इसी कक्ष से हर महीने केंद्र सरकार की योजना के तहत मरीजों को हजारों रुपये की मुफ्त दवाएं दी जाती हैं। दवाओं के सुरक्षित भंडारण और उनकी गुणवत्ता को लेकर चिंता जताई जा रही है।

अस्पताल से जुड़ी जानकारी में यह भी सामने आया कि एचआईवी संक्रमित नवजातों को दी जाने वाली सेप्ट्रोन दवाओं को नुकसान का जोखिम बढ़ सकता है। स्वास्थ्य संस्थानों में दवा कक्ष और संक्रमण वार्ड को उच्च जोखिम वाला क्षेत्र माना जाता है। इन जगहों पर जानवरों की पहुंच पूरी तरह प्रतिबंधित होना जरूरी होता है।

कर्मचारियों की भूमिका भी चर्चा में

मामले का एक अहम पहलू यह भी बताया गया कि एआरटी के एकीकृत परामर्श केंद्र के कुछ कर्मचारी बिल्लियों की देखभाल करते नजर आए। यह स्थिति प्रशासन के लिए चुनौती बन गई है क्योंकि एक ओर सख्त संक्रमण नियंत्रण प्रोटोकॉल हैं और दूसरी ओर अस्पताल परिसर में जानवरों की उपस्थिति दर्ज हो रही है।

अस्पताल प्रबंधन के सामने अब यह सवाल है कि संवेदनशील हिस्सों की निगरानी किस तरह मजबूत की जाए ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।

छह महीने पहले चूहों का मामला भी आया था सामने

यह पहली बार नहीं है जब एमवाय अस्पताल में जानवरों की मौजूदगी ने गंभीर सवाल खड़े किए हों। करीब छह महीने पहले चूहों ने दो नवजात बच्चों को कुतर दिया था। उस दुखद घटना में दोनों नवजातों की मौत हो गई थी। उस समय भी अस्पताल की स्वच्छता और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर व्यापक चर्चा हुई थी। मौजूदा घटना ने उसी पृष्ठभूमि को फिर से सामने ला दिया है।

रोडेंट एंड एनिमल कंट्रोल और हाउसकीपिंग का जिम्मा संभाल रही बीवीजी कंपनी पर दो दिन पहले पच्चीस हजार रुपये का जुर्माना लगाए जाने की जानकारी भी सामने आई है। इसके बावजूद हालात में अपेक्षित सुधार नहीं दिखने की बात कही जा रही है। इससे ठेका आधारित सफाई व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल और गहरे हो गए हैं।

डीन के निर्देश और पिंजरा लगाने की कार्रवाई

पूरे मामले पर एमवाय अस्पताल के डीन अरविंद घनघोरिया ने अस्पताल अधीक्षक को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उनके अनुसार ओपीडी के फर्स्ट फ्लोर पर दो से तीन छोटे बच्चों की मौजूदगी की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही टीम ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की और दो बच्चों को पकड़ लिया गया।

डीन ने कहा कि पकड़े गए बच्चों को उचित प्रक्रिया के तहत जू भेजा जाएगा। यदि कोई बच्चा शेष है तो उसकी निगरानी की जा रही है और संबंधित स्थान पर पिंजरा लगाया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि ओपीडी के पीछे बड़ा केएस कंपाउंड क्षेत्र और कई क्वार्टर हैं जहां से जानवरों के अस्पताल परिसर में आने की संभावना रहती है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि अस्पताल परिसर में ऐसी मौजूदगी स्वीकार्य नहीं है और विशेष सफाई तथा निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।

मरीजों के भरोसे से जुड़ा बड़ा सवाल

एमवाय अस्पताल प्रदेश का प्रमुख सरकारी चिकित्सा संस्थान है जहां बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए आते हैं। एचआईवी जैसे दीर्घकालिक रोग से जूझ रहे मरीजों के लिए यहां नियमित दवा वितरण होता है। ऐसे में दवा कक्ष और संक्रमण वार्ड में स्वच्छता की जरा सी चूक भी गंभीर परिणाम दे सकती है।

अब देखना होगा कि प्रशासन द्वारा दिए गए निर्देश जमीनी स्तर पर कितने प्रभावी साबित होते हैं। मरीजों का भरोसा और अस्पताल की साख दोनों इस बात पर निर्भर करेंगे कि स्थायी समाधान कितनी जल्दी लागू होता है।

Leave a Comment