digvijay singh speech: राजनीति के मंच से एक ऐसी आवाज आई है जिसने साफ कर दिया कि सफर अभी खत्म नहीं हुआ है। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने राज्यसभा से विदाई के मौके पर अपने दिल की बात रखते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि वे राजनीति से दूर नहीं जा रहे बल्कि पहले की तरह सक्रिय रहेंगे।
राजनीति में सक्रियता का दिया भरोसा
अपने संबोधन में दिग्विजय सिंह ने कहा कि यह उनके जीवन का अंत नहीं बल्कि एक नई शुरुआत है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पंक्तियों को याद करते हुए कहा कि वे न थके हैं और न ही रिटायर हुए हैं।
उनकी यह बात साफ संकेत देती है कि आने वाले समय में भी वे राजनीति में अपनी भूमिका निभाते रहेंगे और जनता के बीच सक्रिय रहेंगे।
छात्र जीवन से शुरू हुआ सफर बना लंबी यात्रा
उन्होंने अपने जीवन के शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि छात्र जीवन में उनका राजनीति से कोई खास संबंध नहीं था। लेकिन परिस्थितियों ने उन्हें इस रास्ते पर ला खड़ा किया और केवल 22 साल की उम्र में वे नगर पालिका अध्यक्ष बन गए।
इसके बाद उनका सफर तेजी से आगे बढ़ता गया। 30 साल की उम्र में विधायक बने फिर मंत्री और 46 साल की उम्र में मुख्यमंत्री बने। उन्होंने हमेशा अपनी विचारधारा को सबसे ऊपर रखा और कभी समझौता नहीं किया।
मतभेद रहे लेकिन मनभेद नहीं
अपने भाषण में उन्होंने राजनीति के अनुभव साझा करते हुए कहा कि मतभेद होना स्वाभाविक है लेकिन उन्होंने कभी किसी से व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं रखी।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर उनके किसी शब्द से किसी को दुख पहुंचा हो तो उन्हें उसका खेद है। यह उनकी सरलता और बड़े दिल को दर्शाता है।
बड़े नेताओं से मिली सीख
दिग्विजय सिंह ने बताया कि उन्हें राजीव गांधी अटल बिहारी वाजपेयी और चंद्रशेखर जैसे दिग्गज नेताओं के साथ काम करने का मौका मिला जिससे उन्होंने बहुत कुछ सीखा।
इन अनुभवों ने उनके राजनीतिक जीवन को मजबूत बनाया और उन्हें बेहतर समझ दी।
लोकतंत्र में संवाद की जरूरत
उन्होंने अपने संबोधन में लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत संवाद को बताया। उनका कहना था कि सरकार और विपक्ष को मिलकर रास्ता निकालना चाहिए लेकिन आज इस परंपरा में कमी देखने को मिल रही है।
उन्होंने देश में बढ़ते तनाव और मनमुटाव पर भी चिंता जताई और कहा कि यह लोकतंत्र और समाज के लिए सही नहीं है।
कबीर के संदेश के साथ किया अंत
अपने भाषण का अंत उन्होंने संत कबीरदास की पंक्तियों के साथ किया जिसमें उन्होंने सभी के लिए भलाई की कामना की।
उनका यह संदेश साफ करता है कि राजनीति केवल सत्ता का खेल नहीं बल्कि समाज को जोड़ने का माध्यम भी है।

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