कभी कभी एक छोटी सी देरी किसी परिवार के लिए जीवन भर का दर्द बन जाती है। छतरपुर में ऐसा ही एक दर्दनाक मामला सामने आया है जहां समय पर एम्बुलेंस उपलब्ध न होने से 65 वर्षीय बुजुर्ग की जान चली गई। परिजन उन्हें हार्ट अटैक की आशंका में जिला अस्पताल लेकर पहुंचे लेकिन वहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
रास्ते में बिगड़ी तबीयत और बढ़ी बेचैनी
जानकारी के अनुसार राजनगर थाना क्षेत्र के ग्राम तालगांव निवासी जगदीश विश्वकर्मा अपने बेटे के साथ शहर आए थे। रास्ते में ग्राम बरकोंहाँ के पास अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। उन्हें सीने में तेज दर्द और सांस लेने में परेशानी होने लगी। परिवार ने तत्काल मदद की कोशिश की लेकिन आरोप है कि मौके पर एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं हो सकी।
लोडर वाहन से अस्पताल तक संघर्ष
मजबूरी में परिजन उन्हें एक लोडर वाहन से जिला अस्पताल लेकर निकले। रास्ते में हालत और गंभीर होती गई। बेटे ने चलती गाड़ी में ही सीपीआर देने की कोशिश की ताकि पिता की सांसें चलती रहें। शहर में ट्रैफिक जाम के कारण अस्पताल पहुंचने में और देरी हुई। कुछ लोगों ने आगे बढ़कर रास्ता साफ कराया तब जाकर वाहन अस्पताल तक पहुंच सका।
अस्पताल में मृत घोषित
जिला अस्पताल की ड्यूटी डॉक्टर ने बताया कि मरीज को गंभीर स्थिति में सीने के दर्द के साथ लाया गया था। जांच के दौरान उन्हें मृत पाया गया। सिविल सर्जन ने भी स्पष्ट किया कि मरीज ब्रॉट डेड अवस्था में आया था यानी अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मृत्यु हो चुकी थी। प्रथम दृष्टया कारण हृदयाघात बताया जा रहा है हालांकि वास्तविक कारण पोस्टमॉर्टम से ही स्पष्ट हो सकता था। जानकारी के अनुसार परिजन बिना पोस्टमॉर्टम कराए ही शव को घर ले गए।
स्वास्थ्य व्यवस्था और ट्रैफिक पर सवाल
घटना के बाद शहर में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं और ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। परिजनों का कहना है कि अगर समय पर एम्बुलेंस मिल जाती और रास्ते में जाम न होता तो शायद जान बचाई जा सकती थी। इस मामले पर विपक्ष ने भी प्रदेश सरकार की आलोचना की है और स्वास्थ्य तंत्र को लचर बताया है।
यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि आपातकालीन सेवाओं की उपलब्धता कितनी महत्वपूर्ण है। समय पर मिली सहायता किसी की जिंदगी बचा सकती है और देरी अपूरणीय क्षति में बदल सकती है।

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