Trump Drug Tariff Plan ने वैश्विक फार्मा इंडस्ट्री में हलचल पैदा कर दी है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक नया कार्यकारी आदेश जारी किया है, जिसके तहत कुछ दवाओं पर 100% तक टैरिफ लगाया जा सकता है। यह कदम फार्मास्युटिकल कंपनियों पर दबाव बनाने के लिए उठाया गया है ताकि वे अमेरिकी सरकार के साथ कीमतों को लेकर समझौता करें।
किन कंपनियों पर पड़ेगा असर
इस नए प्लान के तहत उन कंपनियों को राहत दी जाएगी जो अमेरिका में उत्पादन यूनिट बना रही हैं और सरकार के साथ “मोस्ट फेवर्ड नेशन” प्राइसिंग डील कर चुकी हैं। ऐसी कंपनियों पर कोई टैरिफ नहीं लगेगा। हालांकि, जो कंपनियां इन शर्तों को पूरा नहीं करेंगी, उन्हें पहले 20% और बाद में 100% तक टैरिफ का सामना करना पड़ सकता है।
कंपनियों को मिला समय
सरकार ने कंपनियों को बातचीत के लिए समय भी दिया है। बड़ी कंपनियों को 120 दिन और अन्य कंपनियों को 180 दिन का समय दिया गया है। इस दौरान वे सरकार के साथ समझौता कर सकती हैं। Trump Drug Tariff Plan का उद्देश्य कंपनियों को अमेरिका में निवेश के लिए प्रेरित करना भी है।
राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला
ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। उनका मानना है कि दवाओं के आयात पर निर्भरता कम करना जरूरी है। इसलिए स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए यह नीति लागू की जा रही है।
फार्मा कंपनियों और विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
इस फैसले पर कई फार्मा कंपनियों और विशेषज्ञों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि इससे दवाओं की कीमतें बढ़ सकती हैं और निवेश पर असर पड़ सकता है। उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि Trump Drug Tariff Plan से स्वास्थ्य सेवाओं की लागत भी बढ़ सकती है।
अन्य देशों के साथ समझौते
अमेरिका ने कुछ देशों के साथ टैरिफ को लेकर समझौते भी किए हैं। यूरोपीय संघ, जापान और कोरिया जैसे देशों के लिए 15% टैरिफ तय किया गया है। वहीं, ब्रिटेन के लिए यह दर 10% रखी गई है, जो भविष्य में घटाकर शून्य की जा सकती है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर Trump Drug Tariff Plan वैश्विक फार्मा सेक्टर के लिए एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। यह फैसला कंपनियों और बाजार दोनों पर असर डालेगा। आने वाले समय में इसके परिणाम और प्रभाव स्पष्ट रूप से सामने आएंगे।

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