टियर-2 टियर-3 शहरों में इलेक्ट्रिक वाहन क्रांति भारत के परिवहन क्षेत्र में तेजी से नई दिशा दे रही है। अब तक इलेक्ट्रिक वाहनों की चर्चा अक्सर दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों तक सीमित मानी जाती थी, लेकिन हाल के वर्षों में यह तस्वीर तेजी से बदल रही है। टियर-2 टियर-3 शहरों में इलेक्ट्रिक वाहन क्रांति के कारण छोटे शहर EV अपनाने के सबसे बड़े केंद्र बनते जा रहे हैं। यहां इलेक्ट्रिक दोपहिया और तीनपहिया वाहन रोजमर्रा की आवाजाही और छोटे व्यवसायों का अहम हिस्सा बन रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे शहरों की जरूरतें, कम लागत और बेहतर उपयोगिता इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से लोकप्रिय बना रही हैं।
टियर-2 टियर-3 शहरों में इलेक्ट्रिक वाहन क्रांति का बढ़ता दायरा
टियर-2 टियर-3 शहरों में इलेक्ट्रिक वाहन क्रांति के आंकड़े इस बदलाव को स्पष्ट रूप से दिखाते हैं। वित्त वर्ष 2022 में जहां टियर-2 शहरों में EV की हिस्सेदारी लगभग 4.16 प्रतिशत थी, वहीं 2025 तक यह बढ़कर करीब 10.67 प्रतिशत हो गई।
इसी अवधि में टियर-3 शहरों में भी EV अपनाने की दर 1.69 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 8.68 प्रतिशत तक पहुंच गई। यह वृद्धि कई बड़े महानगरों की तुलना में अधिक तेज है।
सूरत, जयपुर, लखनऊ, कोटा और उदयपुर जैसे शहर इलेक्ट्रिक वाहनों के नए केंद्र बनकर उभर रहे हैं। खासकर इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की बिक्री इन शहरों में तेजी से बढ़ रही है।
छोटे शहर EV अपनाने में क्यों आगे
टियर-2 टियर-3 शहरों में इलेक्ट्रिक वाहन क्रांति के पीछे कई व्यावहारिक कारण हैं। सबसे बड़ा कारण लागत है। पेट्रोल वाहनों की तुलना में इलेक्ट्रिक वाहनों का संचालन काफी सस्ता पड़ता है।
जहां पेट्रोल से चलने वाले वाहन का खर्च लगभग 2 से 2.5 रुपये प्रति किलोमीटर हो सकता है, वहीं इलेक्ट्रिक वाहन सिर्फ 0.15 से 0.20 रुपये प्रति किलोमीटर में चल सकते हैं। इससे आम लोगों और डिलीवरी सेवाओं को सालाना हजारों रुपये की बचत होती है।
छोटे शहरों में घरों में पार्किंग और बिजली की सुविधा अपेक्षाकृत आसान होती है, जिससे लोग घर पर ही रात में वाहन चार्ज कर सकते हैं। इससे सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन पर निर्भरता भी कम हो जाती है।
सरकारी योजनाओं से मिल रहा बढ़ावा
टियर-2 टियर-3 शहरों में इलेक्ट्रिक वाहन क्रांति को बढ़ावा देने में सरकारी योजनाएं भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। केंद्र और राज्य सरकारें EV खरीदने पर कई तरह की सब्सिडी और टैक्स छूट दे रही हैं।
पीएम ई-ड्राइव जैसी योजनाएं, उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन नीति और रोड टैक्स में छूट ने EV को अधिक सुलभ बना दिया है। उत्तर प्रदेश, गुजरात और राजस्थान जैसे राज्य इलेक्ट्रिक रिक्शा और व्यावसायिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए विशेष योजनाएं लागू कर रहे हैं।
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर अभी भी चुनौती
टियर-2 टियर-3 शहरों में इलेक्ट्रिक वाहन क्रांति के बावजूद चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर अभी पूरी तरह विकसित नहीं हुआ है। सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों की संख्या अभी भी सीमित है और कई क्षेत्रों में इसकी कमी महसूस की जा रही है।
हालांकि इस चुनौती के बीच सोलर आधारित चार्जिंग समाधान तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। कई जगहों पर सोलर-EV चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा रहे हैं, जिससे बिजली की लागत कम होती है और ऊर्जा आपूर्ति भी स्थिर रहती है।
भारत के EV भविष्य में छोटे शहरों की बड़ी भूमिका
टियर-2 टियर-3 शहरों में इलेक्ट्रिक वाहन क्रांति यह दिखाती है कि भारत का EV भविष्य सिर्फ बड़े महानगरों पर निर्भर नहीं है। छोटे शहर अब इस बदलाव के असली इंजन बनते जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यही रफ्तार जारी रही तो आने वाले वर्षों में भारत में EV अपनाने की सबसे बड़ी वृद्धि इन्हीं शहरों से देखने को मिल सकती है।

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