SaudiArabia: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। सऊदी अरब ने प्रिंस सुल्तान हवाईअड्डे की ओर बढ़ रहे पांच हमलावर ईरानी ड्रोन को बीच रास्ते में ही मार गिराया है। रक्षा मंत्रालय ने बताया कि हवाई सुरक्षा प्रणाली ने समय रहते कार्रवाई कर संभावित बड़े हमले को टाल दिया। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा चिंताओं को और गहरा कर दिया है।
प्रिंस सुल्तान एयरबेस क्यों है इतना अहम
रियाद के दक्षिण में स्थित प्रिंस सुल्तान हवाईअड्डा एक महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाना है जहां अमेरिकी सेना की तैनाती है। यहां करीब 2700 अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं और मिसाइल सुरक्षा प्रणालियों के साथ उन्नत सैन्य उपकरण तैनात हैं। यह केंद्र खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के हवाई अभियानों और निगरानी का प्रमुख आधार माना जाता है।
सऊदी रक्षा मंत्रालय के अनुसार ड्रोन अपने निशाने तक पहुंचने से पहले ही नष्ट कर दिए गए और किसी के घायल होने या नुकसान की खबर नहीं है। हालांकि इस घटना ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
ईरान और इजरायल के बीच बढ़ता संघर्ष
खबरों के मुताबिक ईरान पर अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों के बाद तनाव तेजी से बढ़ा है। सैन्य कार्रवाई के तीसरे दिन तक ईरान में सैकड़ों लोगों की मौत की खबर है। जवाबी कार्रवाई में ईरान समर्थित समूहों ने पड़ोसी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश की है।
इजरायल ने लेबनान में सक्रिय हिजबुल्लाह के एक बड़े कमांडर को मार गिराने का दावा किया है। वहीं लेबनान की राजधानी बेरूत और दक्षिणी इलाकों में हवाई हमलों में कई लोगों की मौत की सूचना है। इस पूरे घटनाक्रम ने पश्चिम एशिया को युद्ध के कगार पर ला खड़ा किया है।
यूरोप और वैश्विक शक्तियों की प्रतिक्रिया
ब्रिटेन फ्रांस और जर्मनी ने संयुक्त बयान जारी कर कहा है कि वे अपने और सहयोगियों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएंगे। ब्रिटेन ने अपने सैन्य ठिकानों के सीमित उपयोग की अनुमति भी दी है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है और परमाणु ठिकानों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के नए नेतृत्व के साथ परमाणु वार्ता की संभावना जताई है लेकिन ईरान की ओर से किसी नई बातचीत से इनकार किया गया है। दोनों पक्षों के बीच बयानबाजी और सैन्य गतिविधियों ने हालात को और जटिल बना दिया है।
तेल बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
तनाव का असर वैश्विक बाजारों पर भी दिखने लगा है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें तेजी से बढ़कर 80 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। शेयर बाजारों में गिरावट दर्ज की गई है और सोने की कीमतों में उछाल आया है। होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर हमलों की खबरों ने तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष और बढ़ता है तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा पड़ सकता है। ऐसे में दुनिया की नजर अब आने वाले कूटनीतिक कदमों पर टिकी है।

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