9072 करोड़ रेलवे मल्टी ट्रैकिंग परियोजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, बिहार और झारखंड के लिए तीन अहम मल्टी-ट्रैकिंग रेलवे परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई। इन परियोजनाओं में गोंदिया-जबलपुर डबलिंग, पुनराख-किउल तीसरी और चौथी लाइन तथा गम्हरिया-चांडिल तीसरी और चौथी लाइन शामिल हैं। इनसे भारतीय रेल नेटवर्क में लगभग 307 किलोमीटर की वृद्धि होगी और इन्हें वर्ष 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
98 लाख लोगों को सीधा लाभ
9072 करोड़ रेलवे मल्टी ट्रैकिंग परियोजना के तहत करीब 5,407 गांवों और लगभग 98 लाख की आबादी को बेहतर रेल कनेक्टिविटी का लाभ मिलेगा। यह विस्तार न केवल यात्रा को आसान बनाएगा, बल्कि पर्यटन स्थलों तक पहुंच भी सुगम करेगा। जबलपुर का कचनार शिव मंदिर, बालाघाट का कान्हा नेशनल पार्क, पेंच राष्ट्रीय उद्यान, धुआंधार जलप्रपात, बरगी बांध, चांडिल डैम और दलमा वन्यजीव अभयारण्य जैसे प्रमुख स्थलों को बेहतर रेल सुविधा मिलेगी।
माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स को बढ़ावा
इन परियोजनाओं से रेलवे की लाइन क्षमता बढ़ेगी, जिससे परिचालन दक्षता और सेवा विश्वसनीयता में सुधार होगा। कोयला, स्टील, लौह अयस्क, सीमेंट, उर्वरक, खाद्यान्न और पेट्रोलियम उत्पाद जैसे आवश्यक माल की ढुलाई में तेजी आएगी। अनुमान है कि इन कार्यों से 52 मिलियन टन प्रति वर्ष अतिरिक्त माल परिवहन क्षमता विकसित होगी। इससे देश की लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी और औद्योगिक विकास को गति मिलेगी।
पर्यावरण और आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम
9072 करोड़ रेलवे मल्टी ट्रैकिंग परियोजना पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाएगी। रेलवे परिवहन ऊर्जा दक्ष और पर्यावरण अनुकूल है। इन परियोजनाओं से लगभग 6 करोड़ लीटर तेल की बचत होगी और 30 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी, जो एक करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है। सरकार का कहना है कि ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री के ‘नया भारत’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन को मजबूत करेंगी।

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