ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच मोहम्मद बागेर ग़ालिबाफ का नाम अचानक सुर्खियों में आ गया है। वॉशिंगटन के कुछ अधिकारी उन्हें संभावित समझौता करने वाले नेता के रूप में देख रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ईरान में भविष्य के नेतृत्व को लेकर कई विकल्पों पर विचार कर रहा है, जिसमें मोहम्मद बागेर ग़ालिबाफ एक प्रमुख नाम बनकर उभरे हैं।
हालांकि व्हाइट हाउस ने किसी एक नेता का खुलकर समर्थन नहीं किया है, लेकिन अंदरूनी स्तर पर संभावित उम्मीदवारों की जांच जारी है। इसी प्रक्रिया में मोहम्मद बागेर ग़ालिबाफ को एक “वर्केबल पार्टनर” माना जा रहा है, जो युद्ध के अगले चरण में बातचीत कर सकते हैं।
मोहम्मद बागेर ग़ालिबाफ कौन हैं
मोहम्मद बागेर ग़ालिबाफ का जन्म 1961 में ईरान के मशहद के पास हुआ था। 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद उन्होंने बसीज मिलिशिया जॉइन की और बाद में ईरान-इराक युद्ध के दौरान इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) में शामिल हुए। मात्र 19 साल की उम्र में उन्होंने सैन्य करियर की शुरुआत की और जल्दी ही कमांडर पद तक पहुंच गए।
उनकी तेज़ प्रगति ने उन्हें ईरान की सेना में एक मजबूत पहचान दिलाई। 1998 में उन्हें IRGC की एयरोस्पेस फोर्स का कमांडर बनाया गया। इसके बाद 1999 में उन्हें देश की राष्ट्रीय पुलिस का प्रमुख नियुक्त किया गया, जहां उन्होंने पुलिस सिस्टम में कई बदलाव किए।
अमेरिका के लिए क्यों अहम हैं मोहम्मद बागेर ग़ालिबाफ
ईरान-अमेरिका तनाव के बीच मोहम्मद बागेर ग़ालिबाफ को लेकर अमेरिका में दिलचस्पी बढ़ना एक बड़ा संकेत माना जा रहा है। कुछ अमेरिकी अधिकारी मानते हैं कि वह एक ऐसे नेता हो सकते हैं जो कठोर रुख के बावजूद बातचीत के लिए तैयार हों।
हालांकि, मोहम्मद बागेर ग़ालिबाफ ने खुद इन सभी दावों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका द्वारा बातचीत की खबरें “फेक न्यूज” हैं और इनका मकसद सिर्फ तेल और वित्तीय बाजारों को प्रभावित करना है। इसके बावजूद उनका नाम लगातार चर्चा में बना हुआ है।
राजनीतिक करियर और विवाद
मोहम्मद बागेर ग़ालिबाफ ने 2005 में राष्ट्रपति चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। इसके बाद वह तेहरान के मेयर बने और तीन बार इस पद पर चुने गए। उनके कार्यकाल में शहर के उत्तरी हिस्सों में विकास कार्य हुए, लेकिन दक्षिणी क्षेत्रों की अनदेखी को लेकर उन्हें आलोचना भी झेलनी पड़ी।
उन पर भ्रष्टाचार और जमीन से जुड़े विवादों के आरोप भी लगे, जिससे उनकी छवि पर असर पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने 2013 और 2024 में फिर से राष्ट्रपति चुनाव लड़ा, जबकि 2017 में उन्होंने चुनाव से अपना नाम वापस ले लिया।
संसद अध्यक्ष के रूप में भूमिका
2020 में मोहम्मद बागेर ग़ालिबाफ ईरान की संसद के स्पीकर बने और तब से इस पद पर बने हुए हैं। इस दौरान उन्होंने देश की आंतरिक और बाहरी नीतियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनकी सख्त छवि और प्रशासनिक अनुभव उन्हें एक मजबूत नेता के रूप में पेश करता है।
क्या बदल सकता है ईरान का भविष्य
ईरान युद्ध के मौजूदा हालात में मोहम्मद बागेर ग़ालिबाफ का नाम उभरना यह दिखाता है कि वैश्विक राजनीति तेजी से बदल रही है। अगर भविष्य में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत होती है, तो मोहम्मद बागेर ग़ालिबाफ एक अहम किरदार निभा सकते हैं।
हालांकि, अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी भूमिका पर नजर बनी हुई है। आने वाले समय में यह साफ होगा कि मोहम्मद बागेर ग़ालिबाफ सिर्फ एक विकल्प हैं या वास्तव में भविष्य के नेता बन सकते हैं।

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