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मार्क जुकरबर्ग का बड़ा कदम, नई AI इंजीनियरिंग कंपनी बनाकर सुपरइंटेलिजेंस रेस तेज

By Dainik Jan Times

Published on: March 6, 2026

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मार्क जुकरबर्ग का बड़ा कदम, नई AI इंजीनियरिंग कंपनी बनाकर सुपरइंटेलिजेंस रेस तेज

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Meta के CEO मार्क जुकरबर्ग AI कंपनी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठा रहे हैं। कंपनी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दौड़ को तेज करने के लिए एक नई एप्लाइड AI इंजीनियरिंग संगठन बनाने का फैसला किया है। मार्क जुकरबर्ग AI कंपनी के इस नए मॉडल के तहत Meta अपनी AI रिसर्च और इंजीनियरिंग टीमों को अलग-अलग हिस्सों में संगठित कर रही है ताकि काम तेजी से आगे बढ़ सके।

Meta का यह कदम उस समय आया है जब दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां सुपरइंटेलिजेंस और उन्नत AI मॉडल बनाने की होड़ में लगी हुई हैं।

मार्क जुकरबर्ग AI कंपनी के तहत नई इंजीनियरिंग टीम

मार्क जुकरबर्ग AI कंपनी के इस नए संगठन का नेतृत्व महेर साबा करेंगे, जो Reality Labs के अनुभवी अधिकारी हैं। यह टीम सीधे Meta के चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर एंड्रयू बोसवर्थ को रिपोर्ट करेगी।

नई टीम का मुख्य काम डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना होगा, जिससे Meta के AI मॉडल पहले से ज्यादा तेज और बेहतर तरीके से ट्रेन हो सकें। कंपनी का लक्ष्य ऐसा डेटा इंजन बनाना है जो मॉडल को लगातार सुधारने में मदद करे।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस टीम की संरचना भी खास होगी। इसमें हर मैनेजर के मुकाबले करीब 50 इंजीनियर और रिसर्चर होंगे ताकि निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज हो सके और नौकरशाही कम हो।

सुपरइंटेलिजेंस की दिशा में Meta की नई रणनीति

मार्क जुकरबर्ग AI कंपनी के इस नए ढांचे में Meta ने कई अलग-अलग टीमों को जिम्मेदारी दी है। इनमें Meta Superintelligence Labs भी शामिल है, जिसका नेतृत्व अलेक्जेंडर वांग कर रहे हैं।

इन टीमों के साथ मिलकर Meta नई पीढ़ी के AI मॉडल विकसित कर रहा है। कंपनी के अंदर इन प्रोजेक्ट्स को “Avocado” और “Mango” जैसे कोडनेम दिए गए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि Meta का यह मॉडल टेक कंपनियों के बीच चल रही AI रेस में बड़ा बदलाव ला सकता है।

AI रेस में जोखिम कम करने की रणनीति

मार्क जुकरबर्ग AI कंपनी के इस नए ढांचे का एक बड़ा उद्देश्य जोखिम को कम करना भी है। कंपनी ने AI विकास को कई टीमों में बांट दिया है ताकि अगर एक टीम को किसी तकनीकी चुनौती का सामना करना पड़े तो दूसरी टीम काम जारी रख सके।

यह रणनीति Meta की लंबे समय से अपनाई गई कार्यशैली से मेल खाती है, जिसमें बड़ी परियोजनाओं को कई नेताओं के बीच बांटकर तेजी और स्थिरता बनाए रखी जाती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले समय में Meta का यह AI ढांचा कंपनी को सुपरइंटेलिजेंस के लक्ष्य तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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