war news: दुनिया के कई हिस्सों में इस समय हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। हाल ही में एस इजरायल के संयुक्त ऑपरेशन लायन्स रोर के तहत ईरान पर किए गए हमले ने पूरे मध्य पूर्व को हिला दिया है। दक्षिणी होर्मोजगन प्रांत के मिनाब शहर में एक स्कूल पर हुए हमले में 40 लोगों की मौत की खबर सामने आई है। इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता और आक्रोश दोनों को जन्म दिया है।
मिनाब के स्कूल पर हमला और भारी जनहानि
ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी के अनुसार मिनाब में लड़कियों के एक प्राथमिक विद्यालय को निशाना बनाया गया। इस हमले में 40 लोगों की मौत हो गई जबकि 45 लोग घायल बताए जा रहे हैं। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि मरने वालों में बड़ी संख्या छात्राओं की है। यह इलाका इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के एक बेस के लिए भी जाना जाता है जिससे क्षेत्र की संवेदनशीलता और बढ़ जाती है।
जवाबी कार्रवाई में ऑपरेशन एपिक फ्यूरी
हमले के बाद तेहरान ने जवाबी कदम उठाते हुए ऑपरेशन एपिक फ्यूरी शुरू किया। रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान ने इजरायल के साथ साथ कुवैत कतर बहरीन और सऊदी अरब में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को भी निशाना बनाया। यूएई के दुबई शहर पर भी हमलों की खबरें सामने आई हैं। इस बढ़ते टकराव ने पूरे गल्फ क्षेत्र में असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है।
क्षेत्रीय देशों में अलर्ट और आपात स्थिति
सऊदी अरब ने बहरीन कतर कुवैत जॉर्डन और यूएई पर हुए हमलों की निंदा की है। लगातार हो रहे हमलों के कारण कई गल्फ देशों ने अपने हवाई अड्डों से उड़ानें रद्द कर दी हैं। दुबई एयरपोर्ट ने अगली सूचना तक सभी फ्लाइट संचालन रोक दिए हैं। इजरायल में भी लोगों के एकत्र होने पर रोक लगा दी गई है। स्कूल और कई दफ्तर बंद कर दिए गए हैं। अस्पतालों के मरीजों को सुरक्षा के लिहाज से शेल्टर जोन में स्थानांतरित किया गया है।
रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने पूरे देश में इमरजेंसी घोषित करते हुए चेतावनी दी है कि मिसाइल और ड्रोन हमलों की आशंका बनी हुई है। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे जरूरी काम के अलावा घर से बाहर न निकलें ताकि सुरक्षा एजेंसियां और एंबुलेंस बिना बाधा काम कर सकें।
बढ़ते तनाव के बीच मानवीय चिंता
इस संघर्ष का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि आम नागरिक इसकी चपेट में आ रहे हैं। स्कूल जैसे संवेदनशील स्थान पर हमला अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों पर भी सवाल खड़ा करता है। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि हालात कब शांत होंगे और क्या कूटनीतिक प्रयास इस तनाव को कम कर पाएंगे।

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