नई दिल्ली: वैश्विक स्तर पर बढ़ते पश्चिम एशिया तनाव के बीच भारत ने एक बार फिर अपने मजबूत कूटनीतिक संबंधों और ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति का उदाहरण पेश किया है। भारत सरकार ने श्रीलंका को 38,000 मीट्रिक टन ईंधन भेजकर संकट की घड़ी में बड़ी मदद दी है।
डीजल और पेट्रोल की बड़ी खेप
इस सहायता के तहत भारत ने श्रीलंका को 20,000 टन डीजल और 18,000 टन पेट्रोल की सप्लाई भेजी है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण ईंधन आपूर्ति प्रभावित हो रही थी, जिससे श्रीलंका को ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ रहा था।
बातचीत के बाद लिया गया फैसला
यह निर्णय भारत के प्रधानमंत्री और श्रीलंका के राष्ट्रपति के बीच हुई उच्च स्तरीय बातचीत के बाद लिया गया। भारत ने समय पर सहायता देकर एक बार फिर क्षेत्रीय स्थिरता में अपनी भूमिका को मजबूत किया है।
राजपक्षे ने जताया आभार
श्रीलंका के वरिष्ठ नेता नमल राजपक्षे ने भारत की इस मदद के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा संकट के समय श्रीलंका के साथ खड़ा रहा है और यह कदम दोनों देशों के मजबूत रिश्तों को दर्शाता है।
‘भारत मॉडल’ अपनाने की सलाह
राजपक्षे ने अपनी सरकार को भारत की आर्थिक नीतियों से सीख लेने की सलाह भी दी। उन्होंने कहा कि भारत का टैक्स और बाजार संतुलन मॉडल आर्थिक स्थिरता और दीर्घकालिक विकास के लिए बेहद प्रभावी है।
रणनीतिक साझेदारी पर जोर
उन्होंने यह भी कहा कि भारत और श्रीलंका के बीच सहयोग को राजनीतिक नजरिए से नहीं देखना चाहिए, बल्कि इसे क्षेत्रीय विकास और स्थिरता के लिए जरूरी साझेदारी के रूप में समझना चाहिए।
भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका
इस कदम के जरिए भारत ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि वह न केवल एक आर्थिक शक्ति बन रहा है, बल्कि क्षेत्रीय संकटों में नेतृत्व करने की क्षमता भी रखता है।
श्रीलंका को भेजी गई यह ईंधन सहायता भारत की मजबूत विदेश नीति और पड़ोसी देशों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता का स्पष्ट उदाहरण है।

Leave a Comment