डिजिटल जनगणना 2027 भारत के प्रशासनिक इतिहास में एक ऐतिहासिक कदम साबित होने जा रही है। वर्ष 2027 में आयोजित होने वाली यह जनगणना पूरी तरह डिजिटल माध्यम से संपन्न होगी। पहली बार मोबाइल एप्लिकेशन और वेब पोर्टल के जरिए आंकड़ों का संकलन किया जाएगा। नागरिक घर बैठे स्वगणना पोर्टल पर अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। बालाघाट सहित सभी जिलों में इसकी तैयारियां प्रारंभ हो चुकी हैं।
सीएमएमएस पोर्टल से होगी निगरानी
डिजिटल जनगणना 2027 की संपूर्ण प्रक्रिया ‘सेंसेस मैनेजमेंट एंड मॉनिटरिंग सिस्टम (सीएमएमएस)’ पोर्टल के माध्यम से मॉनिटर की जाएगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी नागरिकों की व्यक्तिगत जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। किसी भी अधिकारी या प्रगणक द्वारा ओटीपी या बैंक संबंधी जानकारी नहीं मांगी जाएगी।
दो चरणों में होगी प्रक्रिया
डिजिटल जनगणना 2027 दो चरणों में आयोजित की जाएगी। पहला चरण 1 मई से 30 मई 2026 तक चलेगा, जिसमें मकानों की गणना और सूचीकरण होगा। दूसरा चरण फरवरी 2027 में होगा, जिसमें जनसंख्या की गणना की जाएगी। नागरिकों को स्वगणना पोर्टल पर 33 बिंदुओं से संबंधित जानकारी दर्ज करनी होगी।
भारत में जनगणना का इतिहास
भारत में जनगणना की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। मौर्य काल में कौटिल्य के ‘अर्थशास्त्र’ में जनसंख्या के लेखा-जोखा का उल्लेख मिलता है। मुगल काल में अकबर के शासन में भी ‘आइन-ए-अकबरी’ के माध्यम से विवरण संकलित किया गया। आधुनिक वैज्ञानिक जनगणना की शुरुआत 1872 में ब्रिटिश शासनकाल में हुई और 1881 से नियमित दस वर्षीय जनगणना की परंपरा शुरू हुई। कोविड-19 के कारण 2021 की जनगणना स्थगित हो गई थी।
विकास योजनाओं में अहम भूमिका
“रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त, भारत सरकार” द्वारा गृह मंत्रालय के अधीन यह प्रक्रिया कराई जाती है। डिजिटल जनगणना 2027 से प्राप्त आंकड़े देश की साक्षरता दर, लिंगानुपात, रोजगार और सामाजिक-आर्थिक स्थिति का आकलन करने में सहायक होंगे। इन्हीं आंकड़ों के आधार पर सरकार विकास योजनाओं का निर्माण करती है।

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