बेंगलुरु से गोवा के बीच प्रस्तावित बेंगलुरु गोवा वंदे भारत एक्सप्रेस को लेकर सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है, क्योंकि इस प्रीमियम ट्रेन का अनुमानित यात्रा समय लगभग 13 घंटे बताया जा रहा है। जहां एक ओर लोग तेज और आधुनिक सफर की उम्मीद कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर कई यूजर्स सवाल उठा रहे हैं कि जब सड़क मार्ग से यह दूरी कम समय में तय की जा सकती है, तो फिर नई सेवा की आवश्यकता क्या है। फिलहाल यह सेवा प्रस्ताव और मंजूरी के चरण में है तथा अंतिम घोषणा रेलवे बोर्ड की स्वीकृति के बाद ही होगी।
प्रस्ताव और मौजूदा स्थिति
South Western Railway (एसडब्ल्यूआर) ने इस सेवा का विस्तृत प्रस्ताव Railway Board को भेज दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, आधिकारिक घोषणा मंजूरी और ट्रायल रन के बाद ही की जाएगी। प्रस्तावित बेंगलुरु गोवा वंदे भारत एक्सप्रेस को दो ट्रेनसेट की आवश्यकता होगी और इनके उपलब्ध होने पर ही संचालन शुरू किया जा सकेगा।
रेल मंत्री की हालिया बैठक के बाद मंत्रालय ने औपचारिक प्रस्ताव मांगा था, जिसके बाद इसे बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
प्रस्तावित रूट और संभावित समय
यह सेमी-हाई स्पीड सेवा Yesvantpur (बेंगलुरु) से Madgaon तक चलाई जाने की योजना है। प्रस्तावित समय के अनुसार ट्रेन सुबह 6:05 बजे यशवंतपुर से रवाना होकर शाम 7:15 बजे मडगांव पहुंचेगी। वापसी में यह ट्रेन शाम 5:30 बजे मडगांव से चलकर रात 6:40 बजे बेंगलुरु पहुंचेगी।
रूट को मंगलुरु रेल मंडल से होकर ले जाने की योजना है। समय बचाने के लिए पाडिल बाईपास के जरिये मंगलुरु जंक्शन और सेंट्रल स्टेशन को स्किप करने का प्रस्ताव भी शामिल है।
गति बढ़ाने की तैयारी
एसडब्ल्यूआर ने कुछ प्रमुख खंडों पर गति बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है। चिक्का बनवारा से हासन के बीच अधिकतम गति 110 किमी प्रति घंटा से बढ़ाकर 130 किमी प्रति घंटा करने की योजना है। वहीं सकलेशपुर–सुब्रमण्य रोड घाट सेक्शन में 30 किमी प्रति घंटा से 40 किमी प्रति घंटा तक स्पीड बढ़ाने का प्रस्ताव है।
ट्रायल रन के लिए ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग सिस्टम से लैस वंदे भारत रेक का उपयोग किया जाएगा। हासन-थोकुर सेक्शन की ओवरहेड इलेक्ट्रिकल व्यवस्था के प्रमाणन के बाद ही परीक्षण संभव होगा।
13 घंटे के समय पर सोशल मीडिया में नाराजगी
बेंगलुरु गोवा वंदे भारत एक्सप्रेस के 13 घंटे के प्रस्तावित समय को लेकर कई यूजर्स ने नाराजगी जताई है। कुछ लोगों का कहना है कि सड़क मार्ग से यह दूरी लगभग 10 से 11 घंटे में तय की जा सकती है। अन्य यूजर्स ने यह भी सवाल उठाया कि पहले से चल रही ट्रेनें और बसें लगभग इसी समय में सफर पूरा कर रही हैं, तो फिर नई प्रीमियम सेवा से वास्तविक लाभ क्या होगा।
कई पोस्ट में यह तर्क भी दिया गया कि यदि तीन दशक पहले बस से 14 घंटे लगते थे और आज वंदे भारत भी लगभग 13 घंटे ले रही है, तो बुनियादी ढांचे में वास्तविक सुधार कितना हुआ है।
फिलहाल बेंगलुरु गोवा वंदे भारत एक्सप्रेस पर अंतिम फैसला रेलवे बोर्ड की मंजूरी और ट्रायल के बाद ही स्पष्ट होगा। तब तक यह प्रस्ताव चर्चा और उम्मीदों के बीच संतुलन बनाए हुए है।

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