स्टीविया खेती अब किसानों के लिए कम लागत में ज्यादा मुनाफा देने वाली फसल बनती जा रही है। झारखंड के पलामू जिले के किसान सतीश दुबे ने स्टीविया खेती कर एक नई मिसाल पेश की है। स्टीविया खेती के जरिए उन्होंने अपने एक एकड़ खेत से अच्छी आमदनी हासिल की है, जिससे अन्य किसान भी इस ओर आकर्षित हो रहे हैं।
स्टीविया खेती: चीनी से कई गुना ज्यादा मीठा विकल्प
स्टीविया खेती की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पौधा चीनी से 200 से 300 गुना अधिक मीठा होता है। यह एक प्राकृतिक और शून्य कैलोरी स्वीटनर है, जो खासकर मधुमेह रोगियों के लिए सुरक्षित माना जाता है। स्टीविया खेती के कारण इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है।
बाजार में तेजी से बढ़ रही मांग
स्टीविया खेती के बढ़ते चलन के पीछे स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता भी एक बड़ा कारण है। किसान सतीश दुबे के अनुसार, उन्होंने लगभग एक बीघा क्षेत्र में स्टीविया खेती कर करीब 30 किलो सूखी पत्तियां तैयार कीं, जिन्हें 1000 रुपये प्रति किलो की दर से बेचा जा रहा है। इससे उन्हें अच्छा मुनाफा मिल रहा है।
एक बार लगाएं, पांच साल तक पाएं उत्पादन
स्टीविया खेती की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे एक बार लगाने के बाद करीब पांच साल तक उत्पादन लिया जा सकता है। हर तीन महीने में इसकी कटाई होती है, जिससे साल में कई बार आय प्राप्त होती है। स्टीविया खेती किसानों के लिए लगातार कमाई का जरिया बन रही है।
प्रोसेसिंग और उपयोग आसान
स्टीविया खेती से तैयार पत्तियों को सुखाकर उनका पाउडर बनाया जाता है। यह पाउडर चाय, कॉफी, पेय पदार्थ और बेकिंग में चीनी के विकल्प के रूप में इस्तेमाल होता है। इसके अलावा स्टीविया खेती से तैयार उत्पादों का उपयोग शुगर-फ्री दवाइयों में भी बढ़ रहा है।
बाजार की चिंता नहीं, सीधे मिल रहा फायदा
स्टीविया खेती करने वाले किसानों को बाजार की ज्यादा चिंता नहीं रहती, क्योंकि कई कंपनियां सीधे किसानों से संपर्क कर खरीदारी कर रही हैं। इससे किसानों को सही दाम मिल रहा है और उनकी आय में वृद्धि हो रही है। स्टीविया खेती अब पलामू सहित कई क्षेत्रों में तेजी से फैल रही है।
भविष्य में बनेगी कमाई का बड़ा जरिया
स्टीविया खेती आने वाले समय में किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। कम लागत, अधिक मुनाफा और बढ़ती मांग के कारण यह फसल कृषि क्षेत्र में नई संभावनाएं खोल रही है।

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