पीएम किसान योजना लाभार्थी सूची अपडेट के तहत प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 33,325 अपात्र लोगों के नाम सूची से हटा दिए हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बिहार के भागलपुर में चलाए गए विशेष अभियान में यह खुलासा हुआ कि कई लोग नियमों का उल्लंघन कर लाभ ले रहे थे। इस कदम के बाद उन किसानों में चिंता बढ़ गई है जिन्हें अगली किस्त मिलने का इंतजार है।
अपात्र घोषित होने के मुख्य कारण
जांच में सामने आया कि बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारी और पेंशनभोगी योजना का लाभ ले रहे थे। लगभग 24,318 लोग इस श्रेणी में पाए गए। इसके अलावा 3,911 आयकरदाता भी नियमों के विरुद्ध लाभ ले रहे थे। 3,571 मामलों में लाभार्थियों की मृत्यु के बाद भी किस्तें जारी थीं। कई जगह आधार और जमीन रिकॉर्ड में नामों की विसंगतियां भी पाई गईं। कुछ मामलों में अंतरराज्यीय गड़बड़ी सामने आई, जहां निवास झारखंड में था और लाभ बिहार से लिया जा रहा था।
लाभार्थियों की संख्या में बड़ा बदलाव
कार्रवाई से पहले जिले में कुल 2,74,158 लाभार्थी थे। 33,325 नाम हटने के बाद सक्रिय संख्या घटकर 2,40,833 रह गई है। हालांकि चिंता की बात यह है कि इनमें से केवल 1,11,487 किसानों की ही फार्मर आईडी बनी है, जबकि 1,29,346 की आईडी लंबित है। ऐसे किसानों की किस्त रुकने का खतरा बना हुआ है।
फार्मर आईडी अब अनिवार्य
प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य में किसान की पहचान उसकी फार्मर आईडी से ही होगी। जिनके नाम पर जमीन दर्ज है, उन्हें अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराना होगा। फार्मर आईडी न होने पर न केवल पीएम किसान बल्कि अन्य कृषि योजनाओं का लाभ भी बंद हो सकता है। 2 मार्च तक विशेष अभियान चलाकर ई-केवाईसी और पंजीकरण पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। किसानों से अपील है कि वे जल्द से जल्द नजदीकी कृषि कार्यालय या कॉमन सर्विस सेंटर पर संपर्क कर अपनी स्थिति स्पष्ट कर लें।

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