किसान आंदोलन को लेकर एक बार फिर देशभर में हलचल तेज हो गई है। 12 फरवरी को देशव्यापी किसान हड़ताल और 16 फरवरी को महापंचायत का ऐलान किया गया है। यह निर्णय ग्रेटर नोएडा के जैतपुर कार्यालय में आयोजित किसान सभा की जिला कमेटी की बैठक में लिया गया, जहां किसानों से जुड़े जमीनी मुद्दों और सरकार की नीतियों पर गहन चर्चा हुई। किसान सभा ने स्पष्ट किया कि किसानों के अधिकारों और भविष्य से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
12 फरवरी की हड़ताल और 16 फरवरी की महापंचायत
बैठक में तय किया गया कि किसान सभा 12 फरवरी को होने वाले देशव्यापी आंदोलन में सक्रिय भागीदारी करेगी। इसके साथ ही 16 फरवरी को यमुना प्राधिकरण पर आयोजित होने वाली किसान एकता संघ की महापंचायत का समर्थन करते हुए उसमें शामिल होने का फैसला भी लिया गया। किसान सभा ने 1 मार्च को नई जिला कमेटी के चुनाव के लिए सम्मेलन आयोजित करने की घोषणा की है।
किसानों की प्रमुख मांगें
जिला अध्यक्ष डॉ. रुपेश वर्मा ने बताया कि किसान आंदोलन के माध्यम से आबादी निस्तारण, भूमिहीनों के लिए वेंडिंग जोन में दुकानों के आवंटन में आरक्षण, सर्किल रेट बढ़ाने, नया कानून लागू करने और 10 प्रतिशत प्लॉट के मुद्दे पर किसान सभा पूरी मजबूती से खड़ी है। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण स्तर पर आबादी निस्तारण की प्रक्रिया में तेजी लाई गई है और 10 फरवरी को 20 गांवों का निस्तारण प्रस्तावित है।
आंदोलन का इतिहास और आक्रोश
किसान सभा के संघर्षों के चलते 854 प्रकरणों में आबादी निस्तारण की प्रक्रिया चल रही है। इस मुद्दे पर 2023 और 2024 में कई किसान कार्यकर्ताओं को जेल भी जाना पड़ा, जिससे किसानों में गहरा आक्रोश है। संयोजक वीर सिंह नागर ने सरकार की अंतरराष्ट्रीय कृषि डील की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि इससे किसानों के हितों की अनदेखी हुई है।
सरकार पर गंभीर आरोप
जिला महासचिव जगबीर नंबरदार ने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने का वादा खोखला साबित हुआ है। उनका कहना है कि किसान आंदोलन इसलिए जरूरी है क्योंकि मौजूदा नीतियां खेती-किसानी को बर्बादी की ओर धकेल रही हैं। इसी के विरोध में 12 फरवरी को देशव्यापी आंदोलन किया जाएगा।
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