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मार्च में करें खीरे की खेती गर्मियों में पाएँ बंपर मुनाफा कम लागत में ज्यादा उत्पादन का सुनहरा मौका

By Dainik Jan Times

Published on: March 3, 2026

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खीरे की खेती

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गर्मी की शुरुआत होते ही बाजार में एक ऐसी सब्जी की मांग तेजी से बढ़ जाती है जो हर घर की थाली में सलाद के रूप में जरूर दिखाई देती है। हम बात कर रहे हैं खीरे की। मार्च से जून तक इसकी मांग सबसे ज्यादा रहती है। यही वह समय है जब किसान सही योजना बनाकर कम लागत में अच्छी पैदावार लेकर बढ़िया मुनाफा कमा सकते हैं। अब कई किसान पारंपरिक फसलों की जगह खीरे को नकदी फसल के रूप में अपनाने लगे हैं क्योंकि यह कम समय में तैयार होकर अच्छी आय देती है।

कम समय में तैयार होकर देती है तेज आमदनी

आज का किसान ऐसी फसल चाहता है जो जल्दी तैयार हो और बाजार में अच्छे दाम दिलाए। खीरा इस मामले में बेहद फायदेमंद है। जनवरी के आखिर से मार्च तक इसकी बुवाई कर दी जाए तो अप्रैल और मई में तुड़ाई शुरू हो जाती है। गर्मियों में ठंडक देने वाली सब्जी होने के कारण इसकी मांग बढ़ जाती है और कीमत भी अच्छी मिलती है। ऐसे में यह फसल किसानों की आय बढ़ाने का मजबूत जरिया बन सकती है।

खीरे की खेती का सही तरीका

खीरे की खेती ज्यादा कठिन नहीं है लेकिन सही तरीका अपनाना जरूरी है। सबसे पहले खेत की गहरी जुताई करें ताकि मिट्टी भुरभुरी हो जाए। इसके बाद मेड बनाकर मल्च बिछाएं जिससे नमी बनी रहे और खरपतवार कम उगे। मल्च में छेद करके बीज की बुवाई की जाती है। एक एकड़ के लिए करीब एक किलो बीज पर्याप्त होता है। पौधे से पौधे की दूरी लगभग 60 सेंटीमीटर और क्यारियों के बीच 50 सेंटीमीटर दूरी रखना सही माना जाता है। एक स्थान पर दो बीज डालने से अंकुरण बेहतर होता है और उत्पादन भी बढ़ता है।

उपयुक्त मिट्टी और खाद प्रबंधन

खीरे की अच्छी पैदावार के लिए 20 से 40 डिग्री तापमान उपयुक्त रहता है। दोमट मिट्टी इसकी खेती के लिए सबसे बेहतर मानी जाती है। प्रति एकड़ लगभग 6 टन सड़ी हुई गोबर की खाद डालना लाभकारी होता है। इसके साथ संतुलित मात्रा में नाइट्रोजन फॉस्फोरस और पोटाश देना चाहिए। नाइट्रोजन को तीन हिस्सों में देने से पौधे मजबूत बनते हैं और फल ज्यादा लगते हैं। सही पोषण से उत्पादन और गुणवत्ता दोनों बेहतर होती हैं।

ज्यादा उत्पादन देने वाली उन्नत किस्में

अगर किसान सही किस्म का चयन करें तो पैदावार कई गुना बढ़ सकती है। HW 216 किस्म में 40 से 45 दिन में तुड़ाई शुरू हो जाती है और एक पौधे से 3 से 4 किलो तक उत्पादन मिल सकता है। पूसा संयोग और पूसा उदय जैसी किस्में प्रति हेक्टेयर 200 से 250 क्विंटल तक उत्पादन देने की क्षमता रखती हैं। अच्छी किस्म चुनने से बाजार में बेहतर दाम मिलते हैं और मुनाफा बढ़ता है।

बेल वाली फसल में सहारे का महत्व

खीरा बेल वाली फसल है इसलिए इसे बांस या तार का सहारा देना जरूरी है। इससे फल जमीन से ऊपर रहते हैं और सड़ने का खतरा कम हो जाता है। फूल आने के समय कीटों से बचाव के लिए समय पर दवा का छिड़काव करना चाहिए ताकि उत्पादन सुरक्षित रहे और नुकसान न हो।

गर्मियों में बढ़ते दाम से होगा फायदा

गर्मी के मौसम में खीरे का भाव 20 से 25 रुपये प्रति किलो तक मिल सकता है। शादी विवाह और कार्यक्रमों के समय इसकी मांग और बढ़ जाती है। सही समय पर बुवाई और अच्छी देखभाल से एक एकड़ में शानदार मुनाफा कमाया जा सकता है। मार्च में शुरू की गई खेती गर्मियों में बंपर कमाई का जरिया बन सकती है और किसानों की आय बढ़ाने में मददगार साबित हो सकती है।

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