जम्मू में आयोजित तीन दिवसीय एग्रीकल्चर समिट और किसान मेले के उद्घाटन सत्र में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि एग्रीकल्चर फर्स्ट नीति ही विकसित भारत और आत्मनिर्भर जम्मू-कश्मीर की आधारशिला बनेगी। उन्होंने कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों को किसी भी विकासशील राष्ट्र की “अंतिम सुरक्षा कवच” बताते हुए कहा कि बदलते मौसम और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच कृषि स्थिरता और समृद्धि की रीढ़ बनी हुई है।
AI और डिजिटल तकनीक से बदलेगा खेती का भविष्य
उपराज्यपाल ने एग्रीकल्चर फर्स्ट नीति के तहत एआई आधारित खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मौसम, मिट्टी और फसल के आंकड़ों के आधार पर उत्पादन का पूर्वानुमान लगाने वाली सस्ती और सुलभ तकनीक विकसित की जानी चाहिए। अधिकारियों और वैज्ञानिकों को निर्देश देते हुए उन्होंने आईओटी सेंसर और सैटेलाइट इमेजरी के माध्यम से ‘डिजिटल फार्म ट्विन’ तैयार करने की बात कही, जिससे सटीक सिंचाई और बेहतर उत्पादन संभव हो सके।
किसान हित में ठोस कदम जरूरी
उन्होंने एग्रीकल्चर फर्स्ट नीति के अंतर्गत गांव स्तर पर जलवायु अनुकूल बीज बैंक, सर्कुलर फार्मिंग मॉडल और जिला स्तर पर प्रोसेसिंग सुविधाएं विकसित करने की आवश्यकता बताई। साथ ही किसान उत्पादक संगठनों को सीधे बाजार से जोड़कर बिचौलियों की भूमिका खत्म करने पर भी जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और हालिया व्यापार समझौतों को लेकर फैलाई जा रही भ्रांतियां निराधार हैं।
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