नागोया के कासुगाई कंट्री क्लब में शनिवार को खेले गए चौथे और अंतिम राउंड में 18वें ग्रीन पर सिर्फ तीन फुट के एक पुट ने प्रणवी उर्स स्वर्ण पदक और उनकी उम्मीदों के बीच फासला तय किया। भारतीय गोल्फर ने दिन की शुरुआत में अपनी तीन शॉट की बढ़त गंवा दी थी, लेकिन शानदार वापसी करते हुए एक शॉट की बढ़त फिर से हासिल कर ली। इसके बाद सारा दारोमदार उस आखिरी पुट पर आ टिका, जिसे होल करना या चूकना उनके लिए खेल को आसान या मुश्किल बना सकता था।
दबाव में भी नहीं डगमगाईं प्रणवी
विश्व की पांचवें नंबर की खिलाड़ी चीन की रुओनिंग यिन, जो एक शॉट से पीछे थीं, करीब से देख रही थीं कि कहीं भारतीय खिलाड़ी दबाव में आकर प्लेऑफ की स्थिति न बना दें। लेकिन सही समय पर प्रणवी ने अपना संयम बनाए रखा और तीन फुट का पुट होल करते हुए पार स्कोर पूरा किया। इसी के साथ उन्होंने अपनी एक शॉट की बढ़त को बचाते हुए व्यक्तिगत स्वर्ण पदक (चार दिन का कुल स्कोर 15-अंडर) अपने नाम किया और एशियाई खेलों में पोडियम के शीर्ष पर पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला गोल्फर बन गईं।
प्रणवी ने साझा किए अपने जज्बात
मैसूरु की रहने वाली 23 वर्षीय प्रणवी ने बताया कि पहले पुट के बाद वह खुद को कोस रही थीं कि गेंद तीन फुट कम क्यों रह गई, लेकिन फिर खुद को संभाला। उन्होंने कहा कि उस पल उन्होंने खुद से कहा कि चाहे कुछ भी हो, सीधा निशाना साधकर पुट होल करना है। प्रणवी ने स्वीकार किया कि वह काफी नर्वस थीं और पूरी रात सो नहीं पाई थीं, और इस जीत के बाद वह शब्दों में अपनी खुशी बयां नहीं कर पा रही थीं।
शुरुआती राउंड से मिली मजबूत बढ़त
पहले राउंड में चार-अंडर 66 के स्कोर के साथ प्रणवी संयुक्त दूसरे स्थान पर रहीं, इसके बाद दूसरे राउंड में बिना किसी गलती के शानदार सात-अंडर 63 के स्कोर ने उन्हें अकेले दूसरे स्थान पर पहुंचा दिया। तीसरे दिन संयमित चार-अंडर के प्रदर्शन के साथ उन्होंने सिंगापुर की शैनन शुआन यिन टैन पर तीन शॉट की बढ़त बना ली थी।
चौथे राउंड में आया कठिन मोड़
हालांकि चौथे राउंड ने पावर-हिटर प्रणवी को शुरुआत में ही झटका दे दिया। तीसरे होल पर गेंद बंकर में गिरने से उन्हें ट्रिपल-बोगी का सामना करना पड़ा, जिसने अब तक की उनकी पूरी मेहनत पर सवाल खड़ा कर दिया था। लेकिन प्रणवी ने इस झटके से जल्द ही उबरते हुए छठे, दसवें और तेरहवें होल पर बर्डी लगाकर गंवाए गए शॉट्स की भरपाई की और फिर से मुकाबले में आगे आ गईं।
यिन और टैन का भी रहा दमदार प्रदर्शन
दूसरी ओर यिन ने भी अनुशासित खेल दिखाया और फ्रंट नाइन में तीन बर्डी लगाईं, इसके बाद हर होल पर पार स्कोर बनाए रखा। वहीं टैन का प्रदर्शन उतार-चढ़ाव भरा रहा, जिन्होंने छह बर्डी, दो बोगी और एक डबल बोगी दर्ज कीं। जब तीनों शीर्ष खिलाड़ी बैक नाइन के दौरान संक्षिप्त समय के लिए बराबरी पर आईं, तब प्रणवी ने बैक नाइन के दूसरे हिस्से में बढ़त बनाकर उसे बरकरार रखा।
17वें होल का शॉट बना टर्निंग पॉइंट
201 गज की दूरी से फ्लैग की ओर खेला गया प्रणवी का आत्मविश्वास भरा दूसरा शॉट मुकाबले का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। उन्होंने गेंद को करीब 10 फुट दूर पहुंचाया, जहां से राइट-टू-लेफ्ट अपहिल पुट से बर्डी बनाना संभव था, लेकिन यह मौका थोड़े अंतर से चूक गईं और पार स्कोर के साथ होल पूरा किया। प्रणवी ने इस शॉट को टूर्नामेंट का अपना सबसे बेहतरीन शॉट बताया और कहा कि इसी शॉट ने उन्हें 18वें होल पर खेल खत्म करने का आत्मविश्वास दिया, भले ही टी शॉट भटक गया हो और आखिरी पुट भी काफी नर्वस करने वाला रहा हो।
महिला टीम इवेंट में भारत को मिला रजत पदक
प्रणवी के व्यक्तिगत स्वर्ण के साथ-साथ अदिति अशोक ने भी अंतिम दिन तीन-अंडर 67 का शानदार प्रदर्शन किया, जिसमें बेंगलुरु की इस खिलाड़ी ने दसवें से पंद्रहवें होल तक छह बर्डी लगाईं। दिक्षा डागर के साथ मिलकर इन दोनों खिलाड़ियों ने महिला टीम इवेंट में भारत को रजत पदक दिलाया। यह दिन भारतीय महिला गोल्फ के लिए एक ऐसा पल बन गया, जिसकी गूंज नागोया से कहीं आगे पूरे भारत तक पहुंची।
पुरुष वर्ग में नहीं चला जादू
पुरुष वर्ग में भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन उतना प्रभावशाली नहीं रहा। वीर अहलावत ने अपने अभियान का समापन तीन-अंडर 67 के स्कोर के साथ किया, जिन्होंने पहले तीन दिनों में 71-68-65 का स्कोर बनाकर कुल नौ-अंडर 271 के साथ संयुक्त छठे स्थान पर जगह बनाई। सप्तक तलवार (66-68-71-66) भी संयुक्त छठे स्थान पर रहे, जबकि युवराज सिंधू का 71-69-71-70 का स्कोर उन्हें केवल एक-ओवर 281 के साथ संयुक्त 23वें स्थान तक ही पहुंचा सका। टीम स्पर्धा में, जहां हर दिन के सर्वश्रेष्ठ स्कोर गिने जाते हैं, भारतीय पुरुष टीम का कुल 18-अंडर स्कोर उन्हें छठे स्थान पर ही रख सका।

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