फ्लाईदुबई की एक उड़ान में ओमानी सह-पायलट के चाकू से हमला झेलने के बावजूद यात्रियों की जान बचाने वाले भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छर को अब पूरी दुनिया में नायक के तौर पर सराहा जा रहा है। उनकी बहादुरी की चर्चा के साथ ही उनके उपनाम को लेकर भी लोगों में खासी उत्सुकता देखी जा रही है, क्योंकि हिंदी और गुजराती में ‘मच्छर’ शब्द का मतलब सीधे तौर पर उस कीड़े से जुड़ा है, जो हर घर में परेशानी का सबब बनता है।
सोशल मीडिया पर उठे सवाल
गुजरात और पश्चिमी भारत से बाहर रहने वाले कई लोगों के लिए यह नाम तुरंत हिंदी-गुजराती के उस रोजमर्रा के शब्द की याद दिला गया, जिसका इस्तेमाल मच्छर के लिए किया जाता है। पत्रकार शीला भट्ट ने सोशल मीडिया पर बताया कि यह जिज्ञासा उनके व्हाट्सएप चैट तक भी पहुंच गई थी, जहां लोग पूछ रहे थे कि आखिर कैप्टन का उपनाम मच्छर क्यों है।
समुदाय और परंपरा से जुड़ा है यह नाम
शीला भट्ट ने एक अन्य पोस्ट में बताया कि मुंबई की पूर्व नगरसेविका और भाजपा की गुजराती सेल की पूर्व प्रमुख मंगल भानुशाली, जो मच्छर और उनके परिवार को दशकों से जानते हैं, ने उन्हें बताया कि कैप्टन स्मित मच्छर गुजराती ब्रह्मक्षत्रिय समुदाय की हलारी शाखा से ताल्लुक रखते हैं। इस समुदाय की पौराणिक मान्यता है कि यह नागर ब्राह्मणों और क्षत्रियों के मेल से बना है।
गुजरात में आम है यह उपनाम
गुजरात में हाथी, घोड़ा, मनकड़ और पोपट जैसे उपनाम रखने वाले परिवार आम हैं, और इसी कड़ी में मच्छर भी एक स्थापित गुजराती उपनाम माना जाता है। यह उपनाम नागर ब्राह्मण और सिंध-कच्छ से जुड़े व्यापारी समुदाय लोहाणा में भी पाया जाता है। हालांकि इस उपनाम की सटीक उत्पत्ति को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है, लेकिन गुजराती उपनामों पर किए गए एक पुराने अध्ययन में इसके कई संभावित कारण गिनाए गए हैं।
पुराने अध्ययन में मिलते हैं कई तर्क
प्रोफेसर विनोदिनी नीलकंठ ने अपनी 1942 में प्रकाशित किताब ‘गुजराती अटकोनो इतिहास’ में उपनामों की उत्पत्ति पर गहराई से अध्ययन किया था। इस किताब में उन्होंने हास्यपूर्ण या व्यंग्यात्मक उपनामों से जुड़े एक पूरे खंड को समर्पित किया और बताया कि कैसे व्यक्तिगत विशेषताएं धीरे-धीरे पारिवारिक पहचान में बदल जाती हैं। उन्होंने बार-बार आगाह किया कि किसी भी स्पष्ट दिखने वाली व्याख्या को निश्चित मानना जरूरी नहीं है।
पाकिस्तान में भी मौजूद है यह उपनाम
मच्छर उपनाम सीमा पार पाकिस्तान में भी देखने को मिलता है। कराची में ‘मच्छर कॉलोनी’ नाम का एक बड़ा इलाका मौजूद है। हालांकि पाकिस्तानी अखबार डॉन की एक रिपोर्ट के अनुसार इसका नाम मच्छरों से नहीं, बल्कि मछुआरों से जुड़े एक सिंधी शब्द से निकला है, जो उस इलाके में रहने वाले बड़े मछुआरा समुदाय को दर्शाता है।
मच्छर शब्द के और भी हैं अर्थ
मुंबई के पत्रकार-लेखक सौरभ शाह ने एक अलग व्याख्या पेश करते हुए बताया कि मच्छर शब्द के कई अर्थों में से एक जोश या जुनून भी है। उन्होंने इसके लिए गुजराती की प्रसिद्ध विश्वकोश ‘भगवद गोमंडल कोश’ के सातवें खंड के पेज 6873 का हवाला दिया। शाह ने यह भी बताया कि यह उपनाम आमतौर पर गुजराती नागर ब्राह्मणों से जुड़ा माना जाता है और मनकड़, हाथी, घोड़ा तथा मनकोड़ी जैसे अन्य उपनाम भी इसी समुदाय में पाए जाते हैं।
गांवों के नाम से भी जुड़ी है उपनामों की कहानी
नागर समुदाय की विरासत पर आधारित एक जानकारी के अनुसार कई नागर उपनाम गांवों और कस्बों के नामों से निकले हैं। जैसे घोड़ा उपनाम घोड़ादरा गांव से, हाथी उपनाम हाथप से, मनकड़ उपनाम मनकड़वाड़ा से और मनकोड़ी उपनाम मनकोड़ीवाड़ा से जुड़ा माना जाता है। इसी तरह बड़े नागर समूहों की पहचान भी वडनगर से वडनगरा और विसनगर से विसनगरा जैसे नामों से जुड़ी है। इससे यह साफ होता है कि आज जो उपनाम किसी जानवर या कीड़े के नाम जैसा लगता है, वह शुरुआत में सिर्फ परिवार के मूल स्थान का संकेत भी हो सकता है।
नीलकंठ की किताब में दर्ज हैं कई संभावनाएं
नीलकंठ ने मच्छर उपनाम के लिए किसी एक निश्चित व्याख्या पर टिकने की बजाय कई संभावनाएं दर्ज कीं। एक सिद्धांत इसे गुजराती-संस्कृत शब्द ‘मत्सर’ से जोड़ता है, जिसका अर्थ ईर्ष्या या जलन होता है, और यह संभव है कि यह शब्द पीढ़ियों के दौरान उच्चारण में बदलते हुए मच्छर बन गया हो। एक अन्य संभावना इसे उन परिवारों से जोड़ती है, जो किसी ऐसे स्थान से पहचाने जाते थे जहां मच्छरों की भरमार हुआ करती थी।
मजाक से बना हो सकता है उपनाम
नीलकंठ ने उपनामों की एक व्यापक श्रेणी का भी जिक्र किया, जो किसी व्यक्ति के शरीर, व्यवहार, आदतों या परिस्थितियों के आधार पर चिढ़ाने वाले नामों से शुरू हुई होगी। किसी एक व्यक्ति से जुड़ा मजाक उसकी आने वाली पीढ़ियों के साथ भी जुड़ा रह गया, जब तक कि यह उपनाम के तौर पर स्थापित नहीं हो गया। हालांकि नीलकंठ ने हर व्याख्या को पक्की मानने से साफ इनकार किया और कई उपनामों के लिए एक से ज्यादा संभावनाएं या अनिश्चितता जाहिर की।
गर्व का प्रतीक बन गया उपनाम
शीला भट्ट ने भी नागर समुदाय के उपनामों में मच्छर, हाथी, मनकड़ और मनकोड़ी का जिक्र किया और नागर समुदाय को प्रशासन तथा शिक्षा से जुड़ा एक ऐतिहासिक रूप से शिक्षित समुदाय बताया। उन्होंने 15वीं सदी के गुजराती भक्ति कवि नरसिंह मेहता का भी उल्लेख किया, जिन्हें ‘वैष्णव जन तो’ भजन के लिए जाना जाता है। मुंबई के एक निवासी अर्जुन मोदी ने इस पूरे वाकये को संक्षेप में बताते हुए लिखा कि अगर किसी का उपनाम मच्छर है और वह भारत में पला-बढ़ा है, तो उसने जिंदगीभर मच्छर से जुड़े मजाक सुने ही होंगे, लेकिन कैप्टन स्मित मच्छर ने इसे पूरे देश के लिए गर्व का पल बना दिया है।
कैप्टन स्मित मच्छर की बहादुरी ने एक ऐसे गुजराती उपनाम को, जिसकी सटीक उत्पत्ति आज भी अनिश्चित है, पूरी दुनिया में पहचान दिला दी है। भले ही मच्छर शब्द का शाब्दिक अर्थ उस परेशान करने वाले कीड़े से जुड़ा हो, लेकिन अब इस उपनाम के साथ साहस और वीरता की एक नई पहचान जुड़ गई है।
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