इंदौर में फ्री रजिस्ट्री अभियान के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को अपनी आबादी भूमि और मकान से जुड़े संपत्ति दस्तावेज पंजीकृत कराने का मौका मिलेगा। 17 सितंबर से शुरू हो रही इस प्रक्रिया के पहले चरण में करीब 30 हजार लाभार्थियों को जोड़ा गया है। स्वामित्व योजना के तहत तैयार अधिकार अभिलेखों के आधार पर अब संपत्तियों को औपचारिक पंजीकृत दस्तावेज उपलब्ध कराने की व्यवस्था शुरू की जा रही है।
इंदौर फ्री रजिस्ट्री अभियान की शुरुआत
स्वामित्व योजना के तहत तैयार संपत्ति रिकॉर्ड को अब अगले चरण में ले जाया जा रहा है। इंदौर से शुरू होने वाले अभियान में पात्र संपत्तियों की रजिस्ट्री कराकर हितग्राहियों को अधिक औपचारिक कानूनी दस्तावेज उपलब्ध कराने की योजना है।
इंदौर जिले के चयनित ग्रामीण क्षेत्रों में पहले ड्रोन सर्वे और ग्राउंड ट्रूथिंग के जरिए संपत्तियों का रिकॉर्ड तैयार किया गया था। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार जिले के 552 गांव योजना के लिए चयनित किए गए हैं। इनमें बड़ी संख्या में अधिकार अभिलेख तैयार किए जा रहे हैं।
रजिस्ट्री के लिए नहीं देना होगा शुल्क
इस अभियान की सबसे अहम बात यह है कि पात्र हितग्राहियों से पंजीयन शुल्क और स्टांप ड्यूटी नहीं ली जाएगी। रजिस्ट्री से जुड़े खर्च को सरकार की ओर से वहन किए जाने की व्यवस्था की गई है।
इससे उन ग्रामीण परिवारों को राहत मिल सकती है, जो लंबे समय से आबादी भूमि पर रह रहे हैं, लेकिन उनके पास संपत्ति का पूर्ण पंजीकृत दस्तावेज उपलब्ध नहीं था। हालांकि, लाभ केवल उन्हीं संपत्तियों को मिलेगा, जिनका रिकॉर्ड संबंधित योजना के तहत तैयार और पात्र पाया गया है।
गांवों में लगाए जाएंगे विशेष शिविर
ग्रामीणों को पंजीयन कार्यालयों के चक्कर लगाने से बचाने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों के जरिए संबंधित पात्र संपत्तियों की रजिस्ट्री प्रक्रिया को स्थानीय स्तर पर पूरा करने की कोशिश की जाएगी।
इंदौर जिले में प्रक्रिया शुरू करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर भी व्यवस्था की गई है। रिपोर्ट के अनुसार तहसीलदार और नायब तहसीलदारों को उप पंजीयक के अधिकार दिए गए हैं, ताकि रजिस्ट्री प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ सके।
एक महीने में पूरा करने का लक्ष्य
सरकार इस अभियान को तय समयसीमा में पूरा करने की तैयारी में है। सामान्य प्रक्रिया में लगने वाले कई महीनों के मुकाबले पंजीयन कार्य को लगभग एक महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके लिए स्थानीय स्तर पर शिविर और प्रशासनिक अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में दस्तावेज तैयार कराने की प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक होने की उम्मीद है।
संपत्ति दस्तावेज से बैंक लोन में मदद
पंजीकृत संपत्ति दस्तावेज मिलने के बाद ग्रामीण परिवारों के लिए अपनी संपत्ति का कानूनी रिकॉर्ड मजबूत करना आसान होगा। इसके अलावा ऐसे दस्तावेज बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं में भी उपयोगी हो सकते हैं।
संपत्ति के आधार पर लोन या अन्य वित्तीय सुविधा मिलना संबंधित बैंक की पात्रता और नियमों पर निर्भर करेगा। केवल रजिस्ट्री होने से ऋण की मंजूरी स्वतः नहीं मिलती।
स्वामित्व योजना क्या है?
स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण आबादी क्षेत्रों में संपत्तियों का ड्रोन तकनीक से सर्वे किया जाता है। इसके बाद ग्राउंड ट्रूथिंग और संबंधित प्रक्रिया पूरी करके संपत्ति से जुड़े अधिकार अभिलेख तैयार किए जाते हैं।
इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति के स्वामित्व से जुड़े रिकॉर्ड को अधिक व्यवस्थित और प्रमाणिक बनाना है। मध्य प्रदेश में भी इस योजना के तहत बड़ी संख्या में संपत्ति रिकॉर्ड तैयार किए जा चुके हैं।
प्रॉपर्टी कार्ड और रजिस्ट्री में क्या अंतर है?
प्रॉपर्टी कार्ड या अधिकार अभिलेख संपत्ति से जुड़े स्वामित्व का रिकॉर्ड उपलब्ध कराता है। वहीं रजिस्ट्री संपत्ति का पंजीकृत कानूनी दस्तावेज होती है।
नई व्यवस्था में पहले से तैयार अधिकार अभिलेखों के आधार पर पात्र संपत्तियों के पंजीकृत दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं। इससे ग्रामीण संपत्तियों के रिकॉर्ड को अधिक औपचारिक रूप देने का प्रयास किया जा रहा है।
किन लोगों को मिलेगा लाभ?
इस अभियान का लाभ मुख्य रूप से उन पात्र हितग्राहियों को मिलेगा, जिनकी संपत्ति स्वामित्व योजना के तहत तैयार अधिकार अभिलेख में दर्ज है। ऐसे लाभार्थियों के लिए पंजीयन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
इंदौर में पहले चरण के तहत करीब 30 हजार लाभार्थियों को अभियान से जोड़ने की जानकारी सामने आई है। इसके बाद प्रक्रिया को अन्य पात्र संपत्तियों तक विस्तार देने की योजना है।

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