हिंदी सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री मंदाकिनी ने अपने शुरुआती फिल्मी सफर से जुड़ा एक अहम खुलासा किया है। अभिनेत्री ने बताया कि पुराने दौर में फिल्मों के कॉन्ट्रैक्ट आज की तरह औपचारिक नहीं होते थे। कई बार कलाकारों को बिना स्पष्ट भुगतान व्यवस्था के ही काम शुरू करना पड़ता था। इसी वजह से उनके करियर की करीब 16 से 17 फिल्मों की फीस उन्हें कभी नहीं मिली।
मंदाकिनी ने पुराने फिल्मी सेट का माहौल याद किया
अभिनेत्री ने एक बातचीत में अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि उस समय फिल्म सेट का माहौल काफी घरेलू और सहज हुआ करता था। कलाकार और फिल्म से जुड़े दूसरे लोग साथ बैठकर खाना खाते थे।
उन्होंने कहा कि उस दौर में कलाकारों से मिलने के लिए किसी विशेष अनुमति की जरूरत नहीं पड़ती थी। लोग एक-दूसरे के कमरों में आसानी से आ-जा सकते थे। उनके मुताबिक, सेट पर काम करने का अनुभव काफी अपनापन भरा था।
फिल्मों के कॉन्ट्रैक्ट होते थे बेहद अनौपचारिक
अभिनेत्री ने बताया कि उस समय फिल्मों के अनुबंध आज की तुलना में काफी सरल और अनौपचारिक होते थे। कई बार निर्माता या फिल्म से जुड़े लोग सीधे कलाकार से फिल्म साइन करने के लिए कहते थे।
भुगतान की शर्तें हमेशा पहले से स्पष्ट नहीं होती थीं। कुछ मामलों में कलाकार को पैसे मिल जाते थे, जबकि कई बार भुगतान बाद के लिए टल जाता था।
कई फिल्मों की फीस कभी नहीं मिली
अभिनेत्री के अनुसार, उन्हें कभी-कभी सीमित दिनों के लिए काम करने का अनुरोध किया जाता था। यदि किसी फिल्म निर्माता या सहयोगी को उनकी जरूरत होती थी, तो वह कम समय के काम के लिए भी तैयार हो जाती थीं।
हालांकि, बाद में उन्हें अपनी ज्यादातर फिल्मों का भुगतान मिल गया। इसके बावजूद करीब 16 से 17 ऐसी फिल्में रहीं, जिनके लिए उन्हें कोई फीस नहीं मिली।
अधूरी फिल्में बनीं भुगतान में रुकावट
उन्होंने बताया कि भुगतान नहीं मिलने के पीछे अलग-अलग परिस्थितियां थीं। कुछ फिल्मों का निर्माण पूरा नहीं हो पाया और वे रिलीज तक नहीं पहुंच सकीं। वहीं, कुछ प्रोजेक्ट रिलीज तो हुए, लेकिन उनका अंतिम भुगतान पूरा नहीं किया गया।
अभिनेत्री ने पुराने दौर की फिल्म इंडस्ट्री में मौजूद ऐसी व्यवस्थाओं को याद करते हुए बताया कि कई प्रोजेक्ट में भुगतान और रिलीज से जुड़े मामले लंबे समय तक उलझे रहते थे।
पुराने दौर और आज की इंडस्ट्री में बड़ा अंतर
अभिनेत्री की बातों से उस समय के फिल्म उद्योग और मौजूदा दौर के बीच अंतर भी सामने आता है। आज फिल्मों में कलाकारों के अनुबंध और भुगतान की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित है।
वहीं, पुराने समय में व्यक्तिगत संबंधों और आपसी भरोसे के आधार पर कई काम आगे बढ़ते थे। इसी सहज माहौल के बीच कुछ कलाकारों को अपने मेहनताने से भी समझौता करना पड़ता था।

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