जर्मन ऑटोमोबाइल कंपनी Volkswagen ने इलेक्ट्रिक कारों की दक्षता के क्षेत्र में बड़ा दावा पेश किया है। वोक्सवैगन मिशन एफिशिएंसी नाम की इस नई प्रोटोटाइप कार ने 1,278.36 किलोमीटर की यात्रा पूरी करते हुए बेहद कम ऊर्जा खपत दर्ज की है। कंपनी के मुताबिक, यह नजदीकी उत्पादन वाली चार-सीटर इलेक्ट्रिक कारों की श्रेणी में दुनिया की सबसे किफायती कार बनने का रिकॉर्ड हासिल कर चुकी है।
वोक्सवैगन मिशन एफिशिएंसी ने कैसे बनाया रिकॉर्ड?
Mission Efficiency को Volkswagen ID. Polo के कुछ प्रमुख तकनीकी हिस्सों पर तैयार किया गया है, जबकि इसके लिए खास तौर पर डिजाइन की गई बॉडी का इस्तेमाल किया गया है। कार में 99kW की इलेक्ट्रिक मोटर और 54.9kWh का बैटरी पैक दिया गया है।
कार ने जर्मनी के Wolfsburg स्थित Volkswagen Development Centre से यात्रा शुरू की और Poland के Poznań तथा Czech Republic के Olomouc से होते हुए Austria की राजधानी Vienna तक पहुंची। इस दौरान वाहन ने कुल 1,278.36 किलोमीटर का सफर तय किया और वहां पहुंचने पर भी करीब 164 किलोमीटर की अनुमानित रेंज बाकी थी।
बेहद कम रही बिजली की खपत
Volkswagen के अनुसार, पूरी यात्रा के दौरान कार ने चार्जिंग लॉस समेत 7.51 kWh प्रति 100 किलोमीटर की वास्तविक ऊर्जा खपत दर्ज की। वहीं चार्जिंग लॉस को अलग रखने पर खपत केवल 6.89 kWh प्रति 100 किलोमीटर रही।
यात्रा के दौरान कार की औसत गति 67.72 किलोमीटर प्रति घंटा रही, जबकि इसकी अधिकतम गति 138 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंची। इसी कम ऊर्जा खपत के आधार पर Volkswagen ने Record Institute for Germany से संबंधित रिकॉर्ड का दावा किया है।
शानदार एयरोडायनामिक्स बनी बड़ी वजह
Mission Efficiency की सबसे बड़ी खासियत इसका बेहद कम ड्रैग कोएफिशिएंट है। कार का Cd वैल्यू सिर्फ 0.158 बताया गया है, जिसे Volkswagen ने सड़क पर चलने वाली कारों के लिए नया रिकॉर्ड बताया है।
कार की लंबाई 4,775 मिलीमीटर और ऊंचाई 1,392 मिलीमीटर है। इसमें चार लोगों के बैठने की व्यवस्था और कुल 481 लीटर स्टोरेज क्षमता दी गई है। हालांकि, इसके खास टियरड्रॉप डिजाइन के कारण 1.6 मीटर से ज्यादा लंबे पीछे बैठे यात्रियों को आराम में परेशानी हो सकती है।
हल्की बॉडी और खास तकनीक
कार की दक्षता बढ़ाने के लिए इसके वजन को कम रखने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। इसकी बॉडी में हाई-स्ट्रेंथ कार्बन फाइबर-रीइन्फोर्स्ड पॉलिमर और अरामिड कंपोजिट का इस्तेमाल किया गया है। इसके साथ हल्के एल्युमिनियम चेसिस स्ट्रक्चर को भी शामिल किया गया है।
वजन और ऊर्जा नुकसान को कम करने के लिए पीछे इलेक्ट्रोमैकेनिकल ब्रेक का इस्तेमाल किया गया है। यह तकनीक फिलहाल प्रोटोटाइप चरण में है और इसमें पारंपरिक ब्रेक लाइन तथा फ्लूइड की जरूरत कम हो सकती है।
पहियों और सोलर सिस्टम पर भी फोकस
Volkswagen ने कार के पहियों के अंदर भी एयरोडायनामिक्स को बेहतर बनाने के लिए खास तकनीक का इस्तेमाल किया है। कंपनी ने नए पेटेंटेड रिम डिफ्लेक्टर लगाए हैं, जिनका उद्देश्य पहियों के भीतर हवा के प्रवेश से पैदा होने वाली अतिरिक्त टर्बुलेंस को कम करना है।
कार की छत और बूट लिड में फोटोवोल्टिक सिस्टम भी लगाया गया है। इसकी क्षमता 370W है। यह सिस्टम मुख्य रूप से वाहन के ऑन-बोर्ड सिस्टम को बिजली उपलब्ध कराता है और Volkswagen के अनुसार प्रतिदिन लगभग 30 किलोमीटर तक अतिरिक्त रेंज में मदद कर सकता है।
क्या यह कार जल्द होगी लॉन्च?
फिलहाल Volkswagen ने Mission Efficiency को एक कॉन्सेप्ट और प्रोटोटाइप वाहन के तौर पर पेश किया है। कंपनी ने इसे तत्काल उत्पादन में उतारने की घोषणा नहीं की है।
हालांकि, इस प्रोटोटाइप के जरिए विकसित की गई तकनीकों से भविष्य की उत्पादन कारों को फायदा मिलने की उम्मीद है। खासतौर पर कम वजन, बेहतर एयरोडायनामिक्स, कम ऊर्जा खपत और सोलर पावर जैसी तकनीकें आने वाली इलेक्ट्रिक कारों की दक्षता को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
निष्कर्ष
Volkswagen Mission Efficiency ने दिखाया है कि इलेक्ट्रिक कारों में सिर्फ बड़ी बैटरी लगाने के बजाय वजन, डिजाइन और ऊर्जा प्रबंधन को बेहतर बनाकर भी लंबी दूरी हासिल की जा सकती है। कंपनी का यह प्रयोग भविष्य की ज्यादा कुशल और व्यावहारिक इलेक्ट्रिक कारों के लिए महत्वपूर्ण तकनीकी संकेत दे सकता है।

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