मध्य प्रदेश में घूमने का प्लान बना रहे पर्यटकों के लिए बड़ी सुविधा आने वाली है। मध्य प्रदेश पर्यटन बस सेवा के तहत भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और जबलपुर में सिटी टूर शुरू करने की तैयारी है। पर्यटन बोर्ड निजी ऑपरेटरों के जरिए इन शहरों और आसपास के प्रमुख पर्यटन स्थलों को एक सर्किट से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर चुका है। सिटी टूर का अधिकतम किराया सभी करों सहित 300 रुपये प्रति यात्री निर्धारित किया गया है।
मध्य प्रदेश पर्यटन बस सेवा में शामिल होंगे प्रमुख स्थल
प्रस्तावित सर्किट में हर शहर के प्रमुख पर्यटन और ऐतिहासिक स्थलों को जोड़ा गया है। भोपाल में अपर लेक, वन विहार, सैर सपाटा, ट्राइबल म्यूजियम, बिरला मंदिर और इंदिरा गांधी संग्रहालय शामिल होंगे।
इंदौर के सर्किट में राजवाड़ा, कृष्णपुरा छतरी, कांच मंदिर, रालामंडल, लालबाग और पातालपानी को जगह दी गई है। जबलपुर में भेड़ाघाट, धुआंधार फॉल, मदन महल फोर्ट और ग्वारीघाट प्रमुख पड़ाव होंगे।
उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर, श्री महाकाल महालोक, हरसिद्धि मंदिर, रामघाट, कालभैरव, मंगलनाथ मंदिर, जंतर-मंतर और त्रिवेणी संग्रहालय को जोड़ा गया है।
ग्वालियर का सर्किट होगा खास
ग्वालियर के प्रस्तावित पर्यटन सर्किट में ग्वालियर किला, जयविलास पैलेस एवं संग्रहालय, सूर्य मंदिर, फूलबाग तथा तानसेन और मोहम्मद गौस की समाधियां शामिल हैं। इसके साथ मुरैना के मितावली और पड़ावली के मंदिरों को भी सर्किट में जोड़ा गया है।
इससे पर्यटकों को एक ही यात्रा में शहर के ऐतिहासिक स्थलों के साथ आसपास के महत्वपूर्ण पर्यटन केंद्रों को देखने का अवसर मिलेगा।
सुबह 8:30 से शाम 6:30 बजे तक चलेगी बस
टेंडर के अनुसार बस सेवा सुबह 8:30 बजे से शाम 6:30 बजे तक संचालित की जाएगी और सप्ताह में छह दिन चलाना अनिवार्य होगा। ऑपरेटर को फोर्स अर्बेनिया या उससे बेहतर श्रेणी की बस उपलब्ध करानी होगी। ड्राइवर को छोड़कर बस में कम से कम 14 यात्रियों के बैठने की क्षमता होगी।
टिकट की अधिकतम दर सभी करों सहित 300 रुपये प्रति यात्री से अधिक नहीं रखी जा सकेगी। हालांकि स्मारकों की प्रवेश फीस, बोटिंग, रोपवे और अन्य गतिविधियों के शुल्क यात्रियों को अलग से देने होंगे।
ऑनलाइन बुकिंग और सुरक्षा की जिम्मेदारी ऑपरेटर की
पर्यटकों की सुविधा के लिए ऑपरेटर को ऑनलाइन टिकट बुकिंग की व्यवस्था करनी होगी। इसके लिए वेबसाइट, इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म, पेमेंट गेटवे और निर्धारित स्थानों पर कियोस्क उपलब्ध कराने होंगे।
यात्रियों की सुरक्षा, पर्याप्त ड्राइवर-कंडक्टर व टूर गाइड, बस में सीसीटीवी, प्राथमिक उपचार सामग्री और रोजाना संचालन का रिकॉर्ड रखने की जिम्मेदारी भी ऑपरेटर की होगी। बस खराब होने या 48 घंटे से अधिक समय तक उपलब्ध नहीं रहने पर वैकल्पिक बस की व्यवस्था करनी होगी।

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