भोपाल में भोपाल छात्र प्रदर्शन अब लगातार तेज होता नजर आ रहा है। सरकारी छात्रावासों की अव्यवस्थाओं और नर्सिंग छात्रों की लंबित मांगों को लेकर विद्यार्थियों ने अलग-अलग प्रदर्शन किए।
कमला नेहरू गर्ल्स हॉस्टल और शासकीय सीनियर बालक छात्रावास के सैकड़ों विद्यार्थियों ने करीब 10 किलोमीटर पैदल मार्च किया। छात्र कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा।
हॉस्टल की समस्याओं को लेकर छात्रों का मार्च
विद्यार्थियों का आरोप है कि सरकारी छात्रावासों में लंबे समय से जरूरी सुविधाओं की कमी है। उनका कहना है कि शिकायतों के बावजूद समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं किया गया।
छात्रों ने साफ पानी, वाटर कूलर, नियमित सफाई, बेहतर भोजन और चादरों जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की। इसके साथ ही हॉस्टल भवनों के रखरखाव पर ध्यान देने की भी मांग रखी गई।
गर्ल्स हॉस्टल में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी छात्राओं ने सवाल उठाए। उन्होंने पुरुष कर्मचारियों को हटाकर महिला कर्मचारियों की नियुक्ति और वार्डन को हटाने की मांग की।
भोपाल छात्र प्रदर्शन में उठीं ये प्रमुख मांगें
विद्यार्थियों ने हॉस्टल का बजट बढ़ाने के साथ लाइब्रेरी, डिजिटल सुविधाएं, कोचिंग और खेल सामग्री उपलब्ध कराने की मांग की। इसके अलावा नियमित स्वास्थ्य शिविर आयोजित करने की मांग भी रखी गई।
छात्रों का कहना है कि वे अपनी समस्याओं को लेकर पहले भी अधिकारियों से शिकायत कर चुके हैं। उनके मुताबिक, कई बार बजट की कमी का हवाला देकर मामले को टाल दिया गया।
15 दिन में समाधान का आश्वासन
छात्रों के विरोध के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने उनका ज्ञापन स्वीकार किया। विद्यार्थियों के अनुसार, हॉस्टल वार्डन को हटाने और 15 दिनों के भीतर समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया गया है।
छात्रों ने चेतावनी दी है कि तय अवधि में मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे।
नर्सिंग छात्रों ने भी किया प्रदर्शन
इसी बीच भोपाल में नर्सिंग छात्र-छात्राओं ने भी अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। वे मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने के लिए आगे बढ़ रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें पॉलीटेक्निक चौराहे पर रोक दिया।
पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद छात्रों ने मौके पर नारेबाजी की। बाद में नर्सिंग छात्रों के प्रतिनिधिमंडल ने स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला से मुलाकात की।
नर्सिंग छात्रों की परीक्षा और रिजल्ट पर सवाल
छात्रों ने अपनी पढ़ाई में हो रही देरी को लेकर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि एमबीबीएस की पढ़ाई पांच साल में पूरी हो जाती है, जबकि उनकी डिग्री सात साल बाद भी पूरी नहीं हो सकी है।
विद्यार्थियों के अनुसार, अब तक आयोजित कुछ परीक्षाओं के परिणाम जारी नहीं हुए हैं, जबकि कई विंग की परीक्षाएं अभी बाकी हैं। छात्रों ने कहा कि ऐसी स्थिति में उनके भविष्य को लेकर असमंजस बना हुआ है।
नर्सिंग छात्रों का प्रतिनिधिमंडल अब मुख्यमंत्री मोहन यादव से मुलाकात करना चाहता है। छात्रों का कहना है कि वे सीधे मुख्यमंत्री के सामने अपनी समस्याएं रखना चाहते हैं और जल्द समाधान की मांग करेंगे।

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