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सीहोर के परिवार ने अंग्रेजों से मांगे 109 साल पुराने 35 हजार रुपये, ब्रिटेन ने मांगे ये खास दस्तावेज

By Dainik Jan Times

Published on: August 10, 2026

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मध्य प्रदेश के सीहोर से जुड़ी एक 109 साल पुरानी कहानी ने एक बार फिर लोगों का ध्यान खींचा है। प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान ब्रिटिश सरकार को दिए गए 35 हजार रुपये के कर्ज की वापसी के लिए रुठिया परिवार ने ब्रिटेन से संपर्क किया था। अब इस मामले में ब्रिटेन के डेट मैनेजमेंट ऑफिस की ओर से जवाब आया है और परिवार से दावे के समर्थन में मूल दस्तावेज मांगे गए हैं। परिवार का कहना है कि यह मामला अब सिर्फ रकम वापस पाने का नहीं, बल्कि उनके पूर्वजों के सम्मान और इतिहास से जुड़ा है।

1917 में ब्रिटिश सरकार को दिया गया था कर्ज

सीहोर के सेठ जुम्मा लाल रुठिया ने प्रथम विश्वयुद्ध के दौर में ब्रिटिश हुकूमत को 35 हजार रुपये का वार लोन दिया था। उस समय ब्रिटिश शासन की ओर से युद्ध से जुड़ी जरूरतों के लिए आर्थिक सहयोग जुटाया जा रहा था। इसी दौरान रुठिया परिवार की फर्म ने ब्रिटिश सरकार को यह रकम दी थी।

109 साल बाद परिवार ने उठाया पुराना मामला

कई दशक बीतने के बाद परिवार के पुराने दस्तावेजों की जांच के दौरान इस कर्ज से जुड़ा प्रमाण-पत्र सामने आया। परिवार के अनुसार 4 जून 1917 का यह दस्तावेज उस समय दिए गए ऋण का महत्वपूर्ण प्रमाण है। इसके आधार पर उत्तराधिकारियों ने ब्रिटेन सरकार से बकाया रकम को लेकर संपर्क शुरू किया।

ब्रिटेन से आया आधिकारिक जवाब

लंबे पत्राचार के बाद अब ब्रिटेन के डेट मैनेजमेंट ऑफिस की ओर से परिवार को प्रतिक्रिया मिली है। विभाग ने दावे को आगे बढ़ाने के लिए मूल लोन सर्टिफिकेट और उससे संबंधित पत्राचार की प्रतियां मांगी हैं। ब्रिटिश अथॉरिटी की ओर से दस्तावेज मांगे जाने के बाद परिवार को उम्मीद जगी है कि इतने पुराने मामले पर आगे कोई ठोस प्रक्रिया शुरू हो सकती है।

परिवार ने कहा- अब मामला सिर्फ पैसे का नहीं

रुठिया परिवार के अनुसार ब्रिटिश अधिकारियों से जवाब मिलना उनके लिए बड़ी बात है। परिवार का कहना है कि 109 साल पुराने इस मामले को उठाने का उद्देश्य केवल आर्थिक लाभ हासिल करना नहीं है। उनके लिए यह अपने पूर्वजों के योगदान और परिवार के सम्मान से जुड़ा विषय है।

फरवरी में भेजा गया था लीगल नोटिस

विवेक रुठिया की ओर से उनके अधिवक्ता श्रेयांस रानीवाला के माध्यम से इसी साल फरवरी में ब्रिटेन के डेट मैनेजमेंट ऑफिस को ईमेल और हार्ड कॉपी के जरिए कानूनी नोटिस भेजा गया था। इसके बाद ब्रिटिश विभाग की ओर से दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा गया है, ताकि दावे की वैधानिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके।

पुराने दस्तावेज ने फिर खोली इतिहास की परत

विनय रुठिया और विवेक रुठिया के मुताबिक परिवार के पुराने कागजात की छानबीन करते समय 1917 का प्रमाण-पत्र मिला था। दस्तावेज में तत्कालीन सीहोर के पॉलीटिकल एजेंट इन भोपाल डब्ल्यूएस डेविस की ओर से जारी जानकारी का उल्लेख बताया गया है। इसमें सेठ जुम्मा लाल रुठिया फर्म द्वारा ब्रिटिश सरकार को 35 हजार रुपये वार लोन के रूप में दिए जाने की बात सामने आती है।

आज की तारीख में कितनी हो सकती है रकम?

परिवार की ओर से किए गए अनुमान के मुताबिक यदि 1917 में दी गई 35 हजार रुपये की रकम पर 109 वर्षों तक 5.5 प्रतिशत वार्षिक चक्रवृद्धि ब्याज लगाया जाए तो राशि कई करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। हालांकि यह परिवार की गणना है और वास्तविक भुगतान की राशि किसी आधिकारिक निर्णय या कानूनी प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।

सोने की कीमत से भी की गई तुलना

परिवार ने इस पुराने निवेश की मौजूदा कीमत का अनुमान लगाने के लिए सोने के मूल्य का आधार भी लिया है। उनके मुताबिक 1917 के बाद सोने की कीमत में कई गुना वृद्धि हुई है और इस हिसाब से रकम का मूल्य आज 10 करोड़ रुपये से अधिक माना जा सकता है। यह भी एक अनुमानित तुलना है, न कि ब्रिटेन सरकार द्वारा तय की गई देनदारी।

1937 में हुआ था सेठ जुम्मा लाल का निधन

उपलब्ध पारिवारिक जानकारी के अनुसार सेठ जुम्मा लाल रुठिया का निधन 1937 में हुआ था। उनके द्वारा दिए गए कर्ज की वापसी का मामला इसके बाद भी परिवार के पुराने रिकॉर्ड में बना रहा। करीब एक सदी बाद उनके उत्तराधिकारियों ने इन दस्तावेजों के आधार पर मामले को दोबारा उठाया है।

अब दस्तावेजों की जांच के बाद तय होगी आगे की दिशा

ब्रिटिश विभाग द्वारा मूल प्रमाण-पत्र और पुराने पत्राचार की प्रतियां मांगे जाने के बाद अब रुठिया परिवार के सामने अगला कदम दस्तावेज उपलब्ध कराना है। इसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि ब्रिटिश प्रशासन इस दावे को किस कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाता है। फिलहाल 1917 का यह कर्ज और 109 साल बाद आया जवाब इतिहास, परिवार और ब्रिटिश शासन से जुड़े इस अनोखे मामले को फिर चर्चा में ले आया है।

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