महाकाल लोक की सफलता के बाद मध्य प्रदेश सरकार उज्जैन को एक और बड़ी धार्मिक पहचान देने की तैयारी में है। शहर में भगवान श्रीकृष्ण की 151 फीट ऊंची विश्वरूप प्रतिमा स्थापित करने की योजना बनाई गई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के जरिए उज्जैन को श्रीकृष्ण की वैश्विक आध्यात्मिक राजधानी के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रस्तावित प्रतिमा के साथ आधुनिक तकनीक से लैस थ्रीडी प्रोजेक्शन शो भी आकर्षण का प्रमुख केंद्र होगा।
शिप्रा नदी किनारे बनेगी भव्य प्रतिमा
योजना के अनुसार इंदौर रोड स्थित यूनिटी मॉल के पीछे शिप्रा नदी के तट पर करीब 30 एकड़ क्षेत्र में यह विशाल परियोजना विकसित की जाएगी। यहां भगवान श्रीकृष्ण की 151 फीट ऊंची विश्वरूप प्रतिमा स्थापित होगी, जिसे देश की सबसे बड़ी धातु निर्मित श्रीकृष्ण प्रतिमाओं में शामिल किया जाएगा।
हर शाम होगा भव्य 3D प्रोजेक्शन शो
प्रतिमा को केवल स्थापत्य कला तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसे अत्याधुनिक डिजिटल तकनीक से भी जोड़ा जाएगा। हाई-एंड लेजर प्रोजेक्टर, प्रोजेक्शन मैपिंग, आधुनिक लाइटिंग और शक्तिशाली ऑडियो सिस्टम की मदद से प्रतिदिन शाम को 15 से 20 मिनट का विशेष शो प्रस्तुत किया जाएगा। इस प्रस्तुति में श्रीमद्भगवद्गीता का संदेश, भगवान श्रीकृष्ण के जीवन प्रसंग और भारतीय संस्कृति की झलक आधुनिक तकनीक के साथ दिखाई जाएगी।
220 करोड़ रुपये की परियोजना
उज्जैन विकास प्राधिकरण (यूडीए) ने इस परियोजना के लिए करीब 220 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया है। परियोजना के लिए एजेंसी चयन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। सरकार का मानना है कि इसके पूरा होने से धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ सांस्कृतिक और नाइट टूरिज्म को भी नई पहचान मिलेगी।
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी से जुड़े विशेषज्ञ तैयार कर रहे डिजाइन
इस विशाल प्रतिमा का डिजाइन प्रसिद्ध आर्किटेक्ट डॉ. अनिल राम सुतार तैयार कर रहे हैं। वे पद्मभूषण राम वनजी सुतार के पुत्र हैं, जिन्होंने स्टैच्यू ऑफ यूनिटी जैसी विश्व प्रसिद्ध परियोजना से भी जुड़कर काम किया है। प्रतिमा को लगभग 30 फीट ऊंचे पेडस्टल पर स्थापित किया जाएगा, जिससे इसकी भव्यता और अधिक बढ़ जाएगी।
उज्जैन में विकसित होगा नया धार्मिक पर्यटन सर्किट
सरकार की योजना केवल एक विशाल प्रतिमा बनाने तक सीमित नहीं है। महाकाल लोक, सांदीपनि आश्रम, श्रीकृष्ण विश्वरूप प्रतिमा, यूनिटी मॉल और शिप्रा रिवरफ्रंट को जोड़कर एक आधुनिक धार्मिक पर्यटन सर्किट तैयार किया जाएगा। इससे श्रद्धालुओं को दिन और रात दोनों समय आध्यात्मिक अनुभव मिलेगा और पर्यटकों का शहर में ठहराव भी बढ़ेगा।
स्थानीय रोजगार और कारोबार को मिलेगा बढ़ावा
इस परियोजना के पूरा होने के बाद होटल, परिवहन, रेस्टोरेंट, हस्तशिल्प, स्थानीय बाजार और सेवा क्षेत्र में नए रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। साथ ही सिंहस्थ-2028 से पहले उज्जैन को देश और दुनिया के प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्रों में स्थापित करने की दिशा में यह परियोजना महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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