रूपाली गांगुली महाकाल दर्शन को लेकर एक बार फिर चर्चा में हैं। टीवी की लोकप्रिय अभिनेत्री गुरुवार तड़के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंचीं, जहां उन्होंने भस्म आरती में शामिल होकर बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया। इस दौरान अभिनेत्री करीब दो घंटे तक नंदी हॉल में बैठकर पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ आरती में शामिल रहीं।
रूपाली गांगुली महाकाल दर्शन के दौरान दिखीं भावुक
भस्म आरती के दौरान रूपाली गांगुली पारंपरिक अंदाज में सिर पर दुपट्टा ओढ़े नजर आईं। आरती के बाद उन्होंने भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया और मंदिर परिसर में विशेष पूजा-अर्चना की।
दर्शन के बाद अभिनेत्री ने कहा कि उनकी जिंदगी में जो भी सफलता मिली है, वह बाबा महाकाल की कृपा से मिली है। उन्होंने कहा कि जब भी उनका मन विचलित होता है या जीवन में किसी तरह की परेशानी आती है, वह महाकाल के दरबार में आकर शांति महसूस करती हैं।
रूपाली ने भस्म आरती के अनुभव को बेहद दिव्य बताते हुए कहा कि इसे शब्दों में बयां करना आसान नहीं है।
हर दो महीने में महाकाल आने का करती हैं प्रयास
अभिनेत्री ने बताया कि वह पहली बार वर्ष 2020 में महाकालेश्वर मंदिर आई थीं। इसके बाद से वह नियमित रूप से बाबा महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन आने का प्रयास करती हैं।
उन्होंने कहा कि वह लगभग हर दो महीने में महाकाल के दरबार में हाजिरी लगाने की कोशिश करती हैं। इससे पहले भी वह कई बार उज्जैन पहुंच चुकी हैं और हर बार उन्हें यहां आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव होता है।
‘अनुपमा’ से घर-घर में मिली पहचान
रूपाली गांगुली भारतीय टेलीविजन की सबसे लोकप्रिय अभिनेत्रियों में शामिल हैं। कोलकाता में जन्मीं रूपाली ने बचपन से ही अभिनय की दुनिया में कदम रख दिया था। उनके पिता अनिल गांगुली हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के प्रसिद्ध निर्देशक रहे हैं।
हालांकि उन्हें सबसे ज्यादा लोकप्रियता टीवी शो ‘अनुपमा’ से मिली, जिसमें उनके किरदार को दर्शकों ने खूब पसंद किया। इसके अलावा कॉमेडी शो ‘साराभाई वर्सेस साराभाई’ में निभाया गया ‘मोनिशा’ का किरदार भी आज तक दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरें
महाकाल मंदिर में दर्शन के दौरान की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। फैंस अभिनेत्री की सादगी और उनकी धार्मिक आस्था की जमकर सराहना कर रहे हैं।
रूपाली गांगुली की यह यात्रा एक बार फिर यह दिखाती है कि सफलता की ऊंचाइयों पर पहुंचने के बाद भी वह अपनी आध्यात्मिक जड़ों से गहराई से जुड़ी हुई हैं।

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