सोनम वांगचुक संसद मार्च को लेकर दिल्ली में राजनीतिक और सामाजिक माहौल गर्म हो गया है। शिक्षा व्यवस्था में सुधार और परीक्षा पेपर लीक मामलों को लेकर हजारों छात्र, अभिभावक, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न संगठनों के समर्थक राजधानी में जुटे हैं। प्रदर्शनकारियों ने संसद तक मार्च निकालने का ऐलान किया है, जबकि सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर सोमवार सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग एकत्रित होने लगे। लगातार बारिश के बावजूद प्रदर्शनकारियों का उत्साह कम नहीं हुआ और कई लोग राष्ट्रीय ध्वज के साथ सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते नजर आए।
सोनम वांगचुक संसद मार्च को लेकर बढ़ी हलचल
सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक पिछले कई दिनों से शिक्षा प्रणाली में जवाबदेही की मांग को लेकर अनशन पर हैं। शनिवार को उन्हें स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के बीच अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उन्होंने अपना अनशन जारी रखने का फैसला किया है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि हाल के वर्षों में परीक्षा पेपर लीक और अनियमितताओं ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है। आंदोलन से जुड़े नेताओं ने मांग की है कि शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार किए जाएं और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी
संसद मार्च के ऐलान के बाद दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है। जंतर-मंतर और आसपास के क्षेत्रों में बैरिकेडिंग की गई है तथा कई प्रमुख मार्गों पर वाहनों की जांच की जा रही है।
हालांकि पुलिस ने मार्च के लिए अनुमति नहीं होने की बात कही है, लेकिन आंदोलन से जुड़े लोगों ने स्पष्ट किया है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को आगे बढ़ाएंगे।
शिक्षा व्यवस्था को लेकर बढ़ रहा जनसमर्थन
इस आंदोलन को देश के कई शहरों से समर्थन मिल रहा है। मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद सहित विभिन्न स्थानों पर भी विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर सरकार को गंभीरता से कदम उठाने चाहिए।
हाल के महीनों में कई महत्वपूर्ण परीक्षाओं में पेपर लीक के आरोप सामने आने के बाद शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए हैं। इसी मुद्दे को लेकर यह आंदोलन अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सरकार और संबंधित संस्थाओं को प्रभावी सुधारों पर काम करना होगा, ताकि छात्रों का विश्वास दोबारा बहाल किया जा सके।

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