मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच ईरान युद्ध में अमेरिकी सैनिकों की मौत लगातार बढ़ती जा रही है। अमेरिकी सेना ने शनिवार को पुष्टि की कि जॉर्डन में ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमले के दौरान दो और अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई। इसके साथ ही इस संघर्ष में जान गंवाने वाले अमेरिकी सैन्य कर्मियों की संख्या बढ़कर 16 हो गई है। वहीं, एक अन्य सैनिक के लापता होने की भी जानकारी सामने आई है।
ईरान युद्ध में अमेरिकी सैनिकों की मौत से बढ़ी चिंता
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, जॉर्डन में तैनात सैनिक ईरानी हमलों से बचाव अभियान में शामिल थे। हालिया घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मध्य पूर्व में तैनात अमेरिकी बल लगातार बढ़ते खतरे का सामना कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह युद्ध पारंपरिक जमीनी लड़ाई से अधिक ड्रोन, मिसाइल और हवाई हमलों के जरिए लड़ा जा रहा है। ऐसे में क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने लगातार निशाने पर बने हुए हैं।
पहले भी हो चुके हैं कई बड़े हमले
संघर्ष की शुरुआत के बाद फरवरी में कुवैत में हुए एक ड्रोन हमले में छह अमेरिकी सैनिक मारे गए थे। इसके बाद मार्च में सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर हुए हमले में घायल एक सैनिक की भी मौत हो गई थी।
मार्च के दौरान ही इराक में एक सैन्य विमान दुर्घटना में छह अन्य अमेरिकी सैन्यकर्मियों की जान चली गई थी। इसके अलावा हाल ही में अरब सागर में एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में अमेरिकी नौसेना के एक पायलट की भी मौत हो गई।
क्षेत्रीय तनाव लगातार बढ़ रहा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही कह चुके हैं कि यह युद्ध ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकने के लिए आवश्यक है। हालांकि, बढ़ते सैन्य नुकसान ने इस संघर्ष को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
दूसरी ओर, ईरानी अधिकारियों का दावा है कि पिछले तीन सप्ताह में अमेरिकी हमलों में कम से कम 50 लोगों की मौत हुई है और सैकड़ों लोग घायल हुए हैं। इस संघर्ष का असर केवल सैन्य बलों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कई नागरिक और विदेशी कामगार भी इसकी चपेट में आए हैं।
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और लगातार हो रहे हमलों के कारण वैश्विक स्तर पर चिंता गहराती जा रही है। आने वाले दिनों में इस संघर्ष की दिशा और अधिक गंभीर रूप ले सकती है।

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