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भारत-कनाडा व्यापार समझौते को नई रफ्तार, क्या 50 अरब डॉलर का सपना अब होगा पूरा?

By Dainik Jan Times

Published on: July 13, 2026

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भारत-कनाडा व्यापार समझौते को नई रफ्तार, क्या 50 अरब डॉलर का सपना अब होगा पूरा?

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भारत-कनाडा व्यापार समझौता एक बार फिर चर्चा में है। कई वर्षों की असफल कोशिशों और राजनीतिक तनाव के बाद दोनों देशों ने व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) को आगे बढ़ाने के लिए बातचीत तेज कर दी है। दोनों देशों ने वर्ष 2026 तक इस समझौते को अंतिम रूप देने का लक्ष्य रखा है, जिससे द्विपक्षीय व्यापार को नई दिशा मिल सकती है।

हाल ही में ओटावा में दोनों देशों के अधिकारियों के बीच वार्ता का तीसरा दौर संपन्न हुआ, जिसमें व्यापार, सेवाएं, बौद्धिक संपदा अधिकार, निवेश और तकनीकी मानकों जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई।

भारत-कनाडा व्यापार समझौता क्यों है महत्वपूर्ण?

भारत और कनाडा ने वर्ष 2030 तक आपसी व्यापार को 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। वर्तमान में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार इस लक्ष्य से काफी नीचे है, इसलिए इस समझौते को बेहद अहम माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता सफल होता है, तो दोनों देशों के व्यवसायों को नए अवसर मिल सकते हैं और निवेश संबंध भी मजबूत हो सकते हैं।

पहले भी दो बार विफल हो चुकी है पहल

भारत और कनाडा के बीच व्यापार समझौते की पहली बातचीत वर्ष 2010 में शुरू हुई थी, लेकिन लंबे समय तक चर्चा के बावजूद कोई ठोस परिणाम नहीं निकल सका।

इसके बाद वर्ष 2022 में वार्ता को फिर से शुरू किया गया, लेकिन राजनीतिक मतभेदों के कारण प्रक्रिया दोबारा रुक गई। अब दोनों देशों के नेतृत्व में बदलाव और बेहतर कूटनीतिक माहौल के चलते तीसरी बार बातचीत आगे बढ़ रही है।

भारत को कहां दिख रहे हैं अवसर?

भारत के लिए कनाडा एक महत्वपूर्ण बाजार माना जाता है। दवा, इंजीनियरिंग उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स, रसायन, वस्त्र और आईटी सेवाओं के क्षेत्र में भारतीय कंपनियों को नए अवसर मिलने की उम्मीद है।

विशेष रूप से भारतीय फार्मास्युटिकल और टेक्नोलॉजी सेक्टर इस समझौते से बड़े लाभ की उम्मीद कर रहे हैं। कनाडा में बड़ी भारतीय समुदाय और हजारों भारतीय छात्रों की मौजूदगी भी आर्थिक संबंधों को मजबूत करने में मदद कर सकती है।

कनाडा को भारत से क्या उम्मीद?

कनाडा की नजर भारत के तेजी से बढ़ते बाजार पर है। ऊर्जा, कृषि, खनिज और प्राकृतिक संसाधनों के क्षेत्र में कनाडाई कंपनियां भारत में अपनी उपस्थिति बढ़ाना चाहती हैं।

इसके अलावा, निवेश और व्यापारिक पहुंच को आसान बनाने के लिए भी यह समझौता महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच पहले से ही अरबों डॉलर का निवेश मौजूद है, जिसे और बढ़ाने की संभावनाएं देखी जा रही हैं।

क्या तीसरी कोशिश होगी सफल?

हालांकि बातचीत में प्रगति की बात कही जा रही है, लेकिन कई जटिल मुद्दे अभी भी चर्चा का हिस्सा हैं। कृषि, निवेश नियम, बौद्धिक संपदा और घरेलू नीतियों से जुड़े विषयों पर सहमति बनाना आसान नहीं माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि आर्थिक हितों के साथ-साथ राजनीतिक स्थिरता भी इस समझौते की सफलता में अहम भूमिका निभाएगी।

अगर दोनों देश इस बार समझौते को अंतिम रूप देने में सफल होते हैं, तो यह केवल व्यापारिक उपलब्धि नहीं होगी, बल्कि भारत और कनाडा के संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत भी मानी जाएगी।

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