खरीफ सीजन में धान की अच्छी पैदावार का आधार मजबूत और स्वस्थ नर्सरी होती है। लेकिन अगर नर्सरी में अनचाही घास यानी खरपतवार उगने लगें, तो यह धान के पौधों की बढ़वार पर सीधा असर डाल सकती है। ऐसे में किसानों के लिए जरूरी है कि शुरुआत से ही नर्सरी की नियमित निगरानी करें और समय रहते खरपतवार पर नियंत्रण करें। इससे पौधे मजबूत बनते हैं और रोपाई के बाद बेहतर उत्पादन देने में मदद मिलती है।
धान की नर्सरी में खरपतवार क्यों बनते हैं बड़ी समस्या?
धान की बुवाई के कुछ दिनों बाद नर्सरी में खरपतवार उगना शुरू हो जाते हैं। ये अनचाही घास धान के पौधों के साथ पानी, पोषक तत्व और जगह के लिए प्रतिस्पर्धा करती हैं। यदि समय रहते इन्हें नहीं हटाया जाए तो पौधों को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता और उनकी बढ़वार कमजोर पड़ जाती है। इसका असर बाद में खेत में रोपाई और अंतिम उत्पादन पर भी दिखाई देता है।
शुरुआत में ही करें नियमित निगरानी
विशेषज्ञों का मानना है कि किसानों को नर्सरी का नियमित निरीक्षण करना चाहिए। जहां भी छोटी-छोटी खरपतवार दिखाई दें, उन्हें शुरुआती अवस्था में ही हाथ से निकाल देना सबसे बेहतर तरीका माना जाता है। इससे खरपतवार तेजी से फैल नहीं पाते और धान के पौधों को पर्याप्त पोषण मिलता रहता है।
जरूरत पड़ने पर लें कृषि विशेषज्ञ की सलाह
यदि नर्सरी में खरपतवार की मात्रा अधिक हो जाए और हाथ से निकालना संभव न हो, तो बिना सलाह के किसी भी रसायन का उपयोग नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेकर ही उपयुक्त खरपतवारनाशी का प्रयोग करना चाहिए, ताकि धान की नर्सरी को नुकसान न पहुंचे।
पानी का सही प्रबंधन भी है बेहद जरूरी
धान की नर्सरी में संतुलित मात्रा में पानी बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। बहुत अधिक या बहुत कम पानी दोनों ही स्थितियों में खरपतवार तेजी से बढ़ सकते हैं। इसलिए खेत में आवश्यकता के अनुसार ही सिंचाई करें और समय-समय पर पौधों की स्थिति पर नजर बनाए रखें।
स्वस्थ नर्सरी से मिलती है बेहतर पैदावार
अच्छी गुणवत्ता वाले बीज, साफ खेत का चयन और समय पर देखभाल स्वस्थ नर्सरी की पहचान है। यदि किसान शुरुआत से ही खरपतवार नियंत्रण पर ध्यान दें, तो धान की पौध मजबूत और हरी-भरी तैयार होती है। ऐसी पौध रोपाई के बाद तेजी से विकसित होती है और अच्छी पैदावार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
छोटी लापरवाही से हो सकता है बड़ा नुकसान
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि खरपतवार की समस्या देखने में छोटी लग सकती है, लेकिन यदि समय पर इसका नियंत्रण नहीं किया गया तो यह उत्पादन को काफी हद तक प्रभावित कर सकती है। इसलिए नियमित निगरानी, संतुलित सिंचाई और समय पर उचित प्रबंधन अपनाकर किसान अपनी धान की फसल को बेहतर बना सकते हैं।

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