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भारतीय रेलवे में 220 किमी रफ्तार वाली ट्रेन का रास्ता साफ, अहमदाबाद-ढोलेरा परियोजना को मिली मंजूरी

By Dainik Jan Times

Published on: May 13, 2026

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भारतीय रेलवे में 220 किमी रफ्तार वाली ट्रेन का रास्ता साफ, अहमदाबाद-ढोलेरा परियोजना को मिली मंजूरी

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Indian Railways में अहमदाबाद ढोलेरा सेमी हाईस्पीड रेल परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद देश में तेज रफ्तार ट्रेनों का सपना और करीब पहुंच गया है। प्रधानमंत्री Narendra Modi की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने अहमदाबाद (सरखेज) से ढोलेरा तक नई डबल लाइन परियोजना को हरी झंडी दे दी है। इस रेल कॉरिडोर पर ट्रेनें 220 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से दौड़ सकेंगी।

अहमदाबाद ढोलेरा सेमी हाईस्पीड रेल परियोजना को मिली मंजूरी

करीब 20,667 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना रेल मंत्रालय के तहत विकसित की जाएगी। यह भारतीय रेलवे की पहली सेमी हाईस्पीड रेल परियोजना होगी, जिसे पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से तैयार किया जाएगा। इस नई लाइन के शुरू होने के बाद साबरमती से ढोलेरा तक का सफर केवल 48 मिनट में पूरा हो सकेगा।

रेल मंत्री Ashwini Vaishnaw ने कहा कि यह परियोजना देश में भविष्य की हाईस्पीड रेल योजनाओं के लिए नया मानक स्थापित करेगी।

कनेक्टिविटी और उद्योगों को मिलेगा बड़ा फायदा

नई रेल लाइन अहमदाबाद, ढोलेरा स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन, आगामी ढोलेरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और लोथल नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स को बेहतर तरीके से जोड़ने का काम करेगी। इससे यात्रियों को तेज और सुविधाजनक सफर मिलेगा, वहीं उद्योगों और व्यापारिक गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद है।

सरकार का मानना है कि यह परियोजना गुजरात के औद्योगिक विकास को नई दिशा दे सकती है और क्षेत्र में निवेश के अवसर बढ़ा सकती है।

284 गांवों को मिलेगा सीधा लाभ

करीब 134 किलोमीटर लंबी यह रेल लाइन अहमदाबाद जिले के कई क्षेत्रों से होकर गुजरेगी। इससे लगभग 284 गांवों और करीब पांच लाख लोगों को बेहतर रेल संपर्क मिलेगा। सरकार के अनुसार परियोजना से स्थानीय रोजगार और परिवहन सुविधाओं में भी सुधार होगा।

पर्यावरण को भी होगा फायदा

सरकार का दावा है कि यह परियोजना पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। रेल परिवहन ऊर्जा की बचत करने वाला और कम प्रदूषण फैलाने वाला माध्यम माना जाता है। अनुमान है कि इस परियोजना से तेल आयात में लगभग 0.48 करोड़ लीटर की कमी आएगी और करीब 2 करोड़ किलोग्राम कार्बन उत्सर्जन घटेगा। इसे लगभग 10 लाख पेड़ लगाने के बराबर पर्यावरणीय लाभ माना जा रहा है।

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