नई दिल्ली: वैश्विक आर्थिक रैंकिंग को लेकर आई ताज़ा रिपोर्ट में भारत की स्थिति में बदलाव देखने को मिला है। हाल के आकलनों के अनुसार भारत अब दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। इससे पहले भारत चौथे या पांचवें स्थान पर बना हुआ था, लेकिन अब यह खिसककर नीचे आ गया है।
वैश्विक रैंकिंग में क्या बदला?
नई रैंकिंग के अनुसार अब यूनाइटेड किंगडम भारत से आगे निकलकर पांचवें स्थान पर पहुंच गया है। दुनिया की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं की सूची में अमेरिका पहले, चीन दूसरे, जर्मनी तीसरे और जापान चौथे स्थान पर कायम हैं।
गिरावट की बड़ी वजह क्या है?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट असल आर्थिक कमजोरी नहीं, बल्कि तकनीकी कारणों की वजह से हुई है। भारत की जीडीपी का आकलन डॉलर में किया जाता है। हाल के समय में रुपये की डॉलर के मुकाबले कमजोरी के कारण भारत की कुल जीडीपी का मूल्य कम दिखाई दिया।
इसके विपरीत, ब्रिटेन और जापान जैसी अर्थव्यवस्थाओं की मुद्रा अपेक्षाकृत स्थिर रही, जिससे उनकी रैंकिंग बेहतर हो गई।
ग्रोथ के मामले में भारत अभी भी आगे
रैंकिंग में गिरावट के बावजूद भारत की विकास दर अभी भी दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज बनी हुई है। यही वजह है कि विशेषज्ञ भारत को आने वाले समय में फिर से टॉप 5 में वापसी का मजबूत दावेदार मान रहे हैं।
PPP के आधार पर मजबूत स्थिति
क्रय शक्ति समानता (PPP) के आधार पर भारत अभी भी दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। इसका मतलब है कि देश की घरेलू मांग और उपभोग क्षमता मजबूत बनी हुई है।
आगे क्या उम्मीद?
आर्थिक जानकारों का कहना है कि अगर भारत की विकास दर इसी तरह बनी रहती है और रुपये में स्थिरता आती है, तो आने वाले वर्षों में भारत फिर से शीर्ष 5 अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो सकता है।
निष्कर्ष: भारत की रैंकिंग में आई यह गिरावट अस्थायी मानी जा रही है। मजबूत अर्थव्यवस्था, बढ़ता निवेश और बड़ा बाजार देश को जल्द ही फिर से ऊपर ले जा सकता है।

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