अंतरराष्ट्रीय डेस्क: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के बीच प्रस्तावित वार्ता पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक लेबनान में पूर्ण युद्धविराम लागू नहीं होता, वह किसी भी तरह की बातचीत में शामिल नहीं होगा।
लेबनान सीजफायर बना बड़ी शर्त
ईरान का कहना है कि लेबनान में जारी हमले शांति प्रक्रिया में सबसे बड़ी बाधा हैं। जब तक वहां स्थायी शांति स्थापित नहीं होती, तब तक बातचीत का कोई मतलब नहीं है।
इस्लामाबाद में अहम बैठक
इस बीच पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में 11 अप्रैल को एक महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है। इस बैठक में दोनों देशों के बीच हाल ही में घोषित अस्थायी संघर्षविराम को स्थायी समझौते में बदलने पर चर्चा हो सकती है।
इजरायल पर गंभीर आरोप
ईरान ने आरोप लगाया है कि इजरायल जानबूझकर लेबनान में हमले तेज कर शांति वार्ता को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है। वहीं अमेरिका का कहना है कि मौजूदा सीजफायर में लेबनान शामिल नहीं है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चेतावनी
ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि हालात नहीं सुधरे, तो वह हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर सकता है। इससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ सकता है और कीमतों में तेज उछाल आ सकता है।
ऐसे में इस्लामाबाद में होने वाली बैठक पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं, जो इस संकट को सुलझाने में अहम भूमिका निभा सकती है।

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