ईरान-पाकिस्तान जहाज समझौता के तहत ईरान ने 20 पाकिस्तानी जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की अनुमति दे दी है। इस फैसले को वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि इस समुद्री मार्ग पर लंबे समय से तनाव बना हुआ था।
ईरान-पाकिस्तान जहाज समझौता से क्या बदलेगा हालात
ईरान-पाकिस्तान जहाज समझौता के तहत पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने बताया कि इस व्यवस्था के तहत रोजाना दो जहाज इस मार्ग से गुजर सकेंगे। उन्होंने इसे शांति की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया, जो क्षेत्र में स्थिरता ला सकता है।
यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद यह महत्वपूर्ण जलमार्ग लगभग बंद हो गया था, जिससे वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई।
होर्मुज जलडमरूमध्य में संकट और बढ़ता दबाव
ईरान-पाकिस्तान जहाज समझौता के बावजूद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में स्थिति अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 2000 जहाज इस मार्ग के दोनों ओर फंसे हुए हैं और समुद्री यातायात में 90% तक गिरावट आई है।
तेल की कीमतें भी 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी हैं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह जलमार्ग वैश्विक व्यापार की “धड़कन” जैसा है, जिसके बाधित होने से पूरी सप्लाई चेन प्रभावित होती है।
सुरक्षा और नियंत्रण के नए नियम
ईरान-पाकिस्तान जहाज समझौता के साथ ही ईरान ने इस मार्ग पर सख्त नियंत्रण लागू किया है। अब जहाजों को गुजरने से पहले अपने कार्गो, क्रू और गंतव्य की जानकारी देनी होगी।
कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इस मार्ग से गुजरने के लिए जहाजों से भारी शुल्क भी लिया जा रहा है। ईरान की संसद इस व्यवस्था को कानूनी रूप देने पर भी विचार कर रही है।
वैश्विक राजनीति और कूटनीति पर असर
ईरान-पाकिस्तान जहाज समझौता केवल व्यापारिक नहीं, बल्कि कूटनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पाकिस्तान इस समझौते के जरिए क्षेत्रीय शांति और वार्ता को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहा है।
इस बीच अमेरिका, ईरान और अन्य देशों के बीच तनाव अभी भी बना हुआ है, जिससे आने वाले दिनों में इस क्षेत्र की स्थिति और भी अहम हो सकती है।

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