आज हम आपको धर्म और आस्था से जुड़ी एक ऐसी खबर बता रहे हैं जिसने उज्जैन को पूरी तरह भक्ति में डुबो दिया है। नवसंवत्सर के आगाज के साथ ही उज्जैन की पवित्र धरती पर श्रद्धा का अद्भुत नजारा देखने को मिला। हर तरफ मंत्रों की गूंज और भक्तों की आस्था ने इस पावन दिन को और भी खास बना दिया।
शिप्रा तट पर उमड़ा श्रद्धा का सागर
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के इस शुभ अवसर पर सुबह की पहली किरण के साथ ही रामघाट और दत्त अखाड़ा घाट पर हजारों श्रद्धालु पहुंचे। सभी ने भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर अपने जीवन में सुख और समृद्धि की कामना की। शिप्रा नदी के तट पर यह दृश्य बेहद मनमोहक और भावुक कर देने वाला था जहां हर कोई नववर्ष के स्वागत में पूरी श्रद्धा से लीन नजर आया।
महाकाल मंदिर और देवी मंदिरों में विशेष अनुष्ठान
उज्जैन के प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में परंपरा के अनुसार ध्वज परिवर्तन किया गया। वहीं शक्तिपीठ हरसिद्धि मंदिर समेत शहर के सभी देवी मंदिरों में नवरात्रि के चलते विशेष पूजा और साज सज्जा की गई। पूरा शहर भक्ति और उत्सव के रंग में रंगा हुआ नजर आया।
सूर्योपासना से गूंजा पूरा शहर
सुबह साढ़े पांच बजे रामघाट और दत्त अखाड़ा क्षेत्र में कोटि सूर्योपासना का भव्य आयोजन हुआ। इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और नवसंवत्सर का स्वागत किया। ब्रह्म ध्वजा की स्थापना के साथ पूरे वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ। यह आयोजन सिर्फ उज्जैन ही नहीं बल्कि प्रदेश के अन्य जिलों में भी सामूहिक रूप से किया गया।
विक्रमोत्सव 2026 से सजेगा उज्जैन
शाम के समय शिप्रा तट पर सृष्टि आरंभ दिवस उज्जयिनी गौरव दिवस का भव्य आयोजन होने जा रहा है। इस कार्यक्रम में भगवान शिव और शिप्रा नदी की महिमा को नृत्य नाट्य के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा। इसके साथ ही ड्रोन शो और आतिशबाजी से आसमान जगमगा उठेगा। प्रसिद्ध गायक विशाल मिश्रा की संगीत प्रस्तुति इस आयोजन को और भी खास बना देगी।
सम्राट विक्रमादित्य अलंकरण बनेगा आकर्षण
विक्रमोत्सव के तहत इस वर्ष सम्राट विक्रमादित्य अलंकरण भी दिया जाएगा जिसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्ति या संस्था को एक करोड़ एक लाख रुपये की सम्मान राशि प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही राज्य स्तर पर तीन शिखर सम्मान भी दिए जाएंगे। यह आयोजन उज्जैन की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा को नई पहचान देने का कार्य करेगा।
उज्जैन की संस्कृति और विरासत का उत्सव
कार्यक्रम के दौरान कई महत्वपूर्ण ग्रंथों का लोकार्पण भी किया जाएगा जो उज्जैन की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को आगे बढ़ाने में मदद करेंगे। यह पूरा आयोजन सिर्फ एक उत्सव नहीं बल्कि हमारी परंपराओं और आस्था का जीवंत उदाहरण है।

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