दुनिया की प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनियां इन दिनों इलेक्ट्रिक वाहन निवेश संकट का सामना कर रही हैं। हालिया रिपोर्टों के अनुसार पांच बड़ी वैश्विक ऑटो कंपनियों ने मिलकर इलेक्ट्रिक वाहनों में किए गए लगभग 72.2 अरब डॉलर के निवेश को घटाकर दर्ज किया है। इस इलेक्ट्रिक वाहन निवेश संकट का ताजा उदाहरण जापान की दिग्गज कंपनी होंडा है, जिसने अकेले लगभग 15.7 अरब डॉलर का निवेश घटाने की घोषणा की है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग में आई तेज गिरावट और सरकारी सब्सिडी खत्म होने के बाद ऑटो कंपनियों की रणनीति तेजी से बदल रही है। इसका सीधा असर वैश्विक स्तर पर इलेक्ट्रिक वाहन निवेश संकट के रूप में सामने आया है।
होंडा को सबसे बड़ा झटका, तीन इलेक्ट्रिक मॉडल रद्द
इलेक्ट्रिक वाहन निवेश संकट के चलते होंडा ने अमेरिका के लिए प्रस्तावित अपने तीन इलेक्ट्रिक मॉडल रद्द करने का फैसला लिया है। इनमें Honda 0 Series Saloon, Honda 0 SUV और Acura RSX शामिल हैं।
कंपनी ने बताया कि इस निर्णय के कारण उसे लगभग 2.5 ट्रिलियन येन यानी करीब 15.7 अरब डॉलर का नुकसान दर्ज करना पड़ेगा। यह नुकसान मुख्य रूप से अमेरिका में इलेक्ट्रिक वाहन परियोजनाओं और चीन में संचालन से जुड़े निवेश के आंशिक समापन से जुड़ा है।
विश्लेषकों के अनुसार यह फैसला ऐसे समय लिया गया जब इन मॉडलों का बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू होने ही वाला था। इस कारण कंपनी को सप्लायर मुआवजे और अन्य पुनर्गठन खर्चों में भी भारी रकम खर्च करनी पड़ेगी।
पांच कंपनियों को कुल 72 अरब डॉलर का नुकसान
इलेक्ट्रिक वाहन निवेश संकट केवल होंडा तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार कई बड़ी ऑटो कंपनियों को भी इसी तरह के नुकसान का सामना करना पड़ा है।
Ford को इलेक्ट्रिक वाहनों से जुड़ी परियोजनाओं में लगभग 19.5 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है। Stellantis ने करीब 26.5 अरब डॉलर की राशि को निवेश से घटाया है। General Motors ने 6 अरब डॉलर का नुकसान दर्ज किया है, जबकि Porsche ने भी हाल ही में 4.5 अरब डॉलर का नुकसान घोषित किया है।
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि इलेक्ट्रिक वाहन निवेश संकट वैश्विक ऑटो उद्योग के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है।
अमेरिका में मांग गिरने से बढ़ा इलेक्ट्रिक वाहन निवेश संकट
इस इलेक्ट्रिक वाहन निवेश संकट का मुख्य कारण अमेरिका में इलेक्ट्रिक कारों की मांग में आई तेज गिरावट बताया जा रहा है। ट्रंप प्रशासन द्वारा 7,500 डॉलर की संघीय टैक्स क्रेडिट सब्सिडी समाप्त किए जाने के बाद उपभोक्ताओं की रुचि काफी कम हो गई।
आंकड़ों के अनुसार दिसंबर में अमेरिका में इलेक्ट्रिक वाहनों का पंजीकरण सालाना आधार पर लगभग 48 प्रतिशत घटकर 75,000 के आसपास रह गया। बाजार हिस्सेदारी भी 9.9 प्रतिशत से गिरकर करीब 5.3 प्रतिशत रह गई।
जनवरी में भी गिरावट जारी रही और इलेक्ट्रिक वाहनों का पंजीकरण लगभग 41 प्रतिशत कम हो गया। इन परिस्थितियों ने ऑटो कंपनियों के सामने इलेक्ट्रिक वाहन निवेश संकट को और गंभीर बना दिया है।
कंपनियां अब हाइब्रिड वाहनों की ओर बढ़ रहीं
इलेक्ट्रिक वाहन निवेश संकट के बीच कई कंपनियां अपनी रणनीति बदल रही हैं। होंडा ने घोषणा की है कि वह अमेरिका में हाइब्रिड वाहनों के विकास पर अधिक ध्यान देगी।
Stellantis ने भी अपने कुछ इलेक्ट्रिक मॉडल को प्लग-इन हाइब्रिड तकनीक में बदलने का फैसला लिया है। वहीं Porsche ने अपने लोकप्रिय मॉडलों के पेट्रोल संस्करणों के उत्पादन को भी जारी रखने का निर्णय लिया है।
Ford का अनुमान है कि 2030 तक उसकी कुल बिक्री में हाइब्रिड, एक्सटेंडेड-रेंज इलेक्ट्रिक और बैटरी इलेक्ट्रिक वाहनों का संयुक्त हिस्सा लगभग 50 प्रतिशत तक हो सकता है।
चीन में भी बढ़ रही होंडा की चुनौती
विश्लेषकों के अनुसार इलेक्ट्रिक वाहन निवेश संकट के अलावा होंडा को चीन के बाजार में भी कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। पिछले साल कंपनी ने चीन में केवल 17,000 इलेक्ट्रिक वाहन बेचे, जो वहां की कुल बिक्री का लगभग 2.5 प्रतिशत है।
चीन की घरेलू इलेक्ट्रिक वाहन कंपनियां तेज विकास चक्र और उन्नत सॉफ्टवेयर तकनीक के कारण तेजी से आगे बढ़ रही हैं। इससे विदेशी कंपनियों के लिए प्रतिस्पर्धा और कठिन हो गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इलेक्ट्रिक वाहन निवेश संकट लंबे समय तक जारी रहा तो वैश्विक ऑटो उद्योग की रणनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

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