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US-ईरान युद्ध का असर, भारत में LPG आपूर्ति संकट से निपटने को सरकार का बड़ा फैसला

By Dainik Jan Times

Published on: March 6, 2026

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US-ईरान युद्ध का असर, भारत में LPG आपूर्ति संकट से निपटने को सरकार का बड़ा फैसला

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अमेरिका-ईरान युद्ध और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच भारत में संभावित LPG आपूर्ति संकट को लेकर सरकार सतर्क हो गई है। हालात को देखते हुए केंद्र सरकार ने आपात प्रावधान लागू करते हुए तेल रिफाइनरियों को रसोई गैस का उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दिया है। भारत में लाखों परिवार खाना बनाने के लिए LPG पर निर्भर हैं, इसलिए LPG आपूर्ति संकट की स्थिति पैदा न हो, इसके लिए सरकार ने पहले से ही तैयारी शुरू कर दी है।

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LPG आयातक देश है और यहां खपत का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा होता है। ऐसे में मध्य पूर्व में किसी भी तरह की अस्थिरता का सीधा असर देश की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है।

LPG आपूर्ति संकट को रोकने के लिए सरकार का आपात कदम

रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार ने सभी तेल रिफाइनरियों को निर्देश दिया है कि वे उपलब्ध प्रोपेन और ब्यूटेन का पूरा उपयोग रसोई गैस उत्पादन में करें। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि संभावित LPG आपूर्ति संकट से बचा जा सके और घरेलू उपभोक्ताओं को किसी तरह की परेशानी न हो।

इसके अलावा सरकार ने गैस उत्पादकों को यह भी निर्देश दिया है कि वे प्रोपेन और ब्यूटेन की आपूर्ति सरकारी तेल कंपनियों को करें। इन कंपनियों में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम शामिल हैं।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश में इस समय लगभग 33.2 करोड़ सक्रिय LPG उपभोक्ता हैं, जिनकी गैस आपूर्ति बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है।

भारत की LPG जरूरत और आयात पर निर्भरता

भारत में LPG की कुल मांग का लगभग दो-तिहाई हिस्सा आयात से पूरा होता है। इनमें से करीब 85 से 90 प्रतिशत आपूर्ति मध्य पूर्व के देशों से आती है।

2025 में भारत ने पश्चिम एशिया से लगभग 13.9 अरब डॉलर मूल्य की LPG आयात की थी, जो कुल आयात का लगभग 46.9 प्रतिशत था। ऐसे में यदि क्षेत्र में तनाव बढ़ता है तो LPG आपूर्ति संकट की आशंका बढ़ सकती है।

इसी कारण सरकार ने घरेलू उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ वैकल्पिक स्रोतों की तलाश भी तेज कर दी है।

पेट्रोकेमिकल उद्योग पर पड़ सकता है असर

प्रोपेन और ब्यूटेन को LPG उत्पादन की ओर मोड़ने का असर पेट्रोकेमिकल उद्योग पर भी पड़ सकता है। सामान्यतः इन गैसों का उपयोग पेट्रोकेमिकल उत्पादों जैसे पॉलीप्रोपाइलीन और अल्काइलेट बनाने में किया जाता है।

अब इन गैसों का बड़ा हिस्सा रसोई गैस उत्पादन में इस्तेमाल होगा, जिससे कुछ कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है। हालांकि सरकार का कहना है कि मौजूदा स्थिति में घरेलू गैस आपूर्ति बनाए रखना अधिक महत्वपूर्ण है।

LPG आपूर्ति संकट से बचने के लिए नए विकल्प तलाश रहा भारत

भारत सरकार ने ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए अन्य देशों से भी संपर्क बढ़ाया है। खबरों के अनुसार भारत अमेरिका से समुद्री बीमा सुरक्षा की व्यवस्था करने की कोशिश कर रहा है, ताकि मध्य पूर्व से आने वाले तेल और गैस के जहाज सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर सकें।

इसके अलावा भारत अल्जीरिया की कंपनी सोनात्राक और अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी सहित कई अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कंपनियों के साथ बातचीत कर रहा है।

सरकार वैश्विक ट्रेडिंग कंपनियों जैसे टोटलएनर्जी, विटोल और ट्रैफिगुरा के साथ भी अतिरिक्त तेल और गैस आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए चर्चा कर रही है।

साथ ही हाल के महीनों में भारत ने अमेरिका से कच्चे तेल और LPG के आयात में भी बढ़ोतरी की है, ताकि संभावित LPG आपूर्ति संकट का असर घरेलू बाजार पर कम से कम पड़े।

कुल मिलाकर, सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि अंतरराष्ट्रीय हालात चाहे जैसे भी हों, देश में रसोई गैस की आपूर्ति लगातार बनी रहे और आम उपभोक्ताओं को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

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