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ईरान-इजरायल युद्ध से भारत में यूरिया उत्पादन घटा, किसानों के लिए बड़ा संकट संकेत

By Dainik Jan Times

Published on: March 5, 2026

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ईरान-इजरायल युद्ध से भारत में यूरिया उत्पादन घटा, किसानों के लिए बड़ा संकट संकेत

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मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब भारत की कृषि व्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान-इजरायल युद्ध से भारत में यूरिया उत्पादन घटा है, जिससे उर्वरक उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है। कतर से आने वाली लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की सप्लाई प्रभावित होने के कारण कई उर्वरक कंपनियों ने उत्पादन कम करना शुरू कर दिया है। यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो किसानों और सरकार दोनों के सामने नई चुनौती खड़ी हो सकती है।

ईरान-इजरायल युद्ध से भारत में यूरिया उत्पादन घटा, एलएनजी सप्लाई बना कारण

विशेषज्ञों के मुताबिक यूरिया उत्पादन के लिए एलएनजी एक महत्वपूर्ण कच्चा माल है। ऊर्जा स्रोत के साथ-साथ यह उत्पादन प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाता है। लेकिन मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण गैस सप्लाई बाधित होने लगी है, जिसके चलते ईरान-इजरायल युद्ध से भारत में यूरिया उत्पादन घटा की स्थिति बन गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने लगभग 2.7 करोड़ टन एलएनजी का आयात किया, जो देश की कुल गैस खपत का करीब आधा हिस्सा है और इसका बड़ा भाग कतर से आता है।

फर्टिलाइजर कंपनियों ने घटाया उत्पादन

रिपोर्ट्स के अनुसार इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव लिमिटेड (IFFCO) सहित कई कंपनियों ने अपने यूरिया संयंत्रों में उत्पादन कम करना शुरू कर दिया है। उद्योग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि अगर गैस सप्लाई में बाधा जारी रही तो कुछ संयंत्रों को अस्थायी रूप से बंद भी करना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में ईरान-इजरायल युद्ध से भारत में यूरिया उत्पादन घटा का असर किसानों तक पहुंच सकता है।

सरकार का दावा: फिलहाल पर्याप्त भंडार

उर्वरक मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सरकार भू-राजनीतिक स्थिति पर लगातार नजर रख रही है और फिलहाल देश में उर्वरकों की कोई कमी नहीं है। फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया के महानिदेशक सुरेश कुमार चौधरी ने भी कहा कि निकट भविष्य की मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त भंडार मौजूद है। हालांकि अगर ईरान-इजरायल युद्ध से भारत में यूरिया उत्पादन घटा की स्थिति लंबे समय तक जारी रहती है, तो आगे चलकर समस्या बढ़ सकती है।

पाकिस्तान में भी दिखा संकट का असर

मध्य पूर्व के इस संघर्ष का असर पड़ोसी देश पाकिस्तान पर भी पड़ा है। वहां की प्रमुख गैस कंपनी सुई नॉर्दर्न गैस पाइपलाइन्स लिमिटेड ने अपने ग्राहकों को सूचित किया है कि वह उर्वरक संयंत्रों को रीगैसिफाइड एलएनजी की सप्लाई नहीं कर पाएगी। पाकिस्तान भी अपनी अधिकांश एलएनजी कतर से आयात करता है, इसलिए वहां भी उर्वरक उत्पादन पर असर पड़ने लगा है।

महंगे आयात से सरकार पर बढ़ सकता है दबाव

अगर घरेलू उत्पादन में कमी जारी रहती है तो भारत को मानसून सीजन से पहले उर्वरकों के महंगे आयात पर निर्भर होना पड़ सकता है। भारत दुनिया में चावल का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक है, जबकि गेहूं, कपास और चीनी के उत्पादन में भी अग्रणी देशों में शामिल है। ऐसे में ईरान-इजरायल युद्ध से भारत में यूरिया उत्पादन घटा की स्थिति कृषि क्षेत्र के लिए चिंता बढ़ा सकती है।

सब्सिडी और राजकोषीय घाटे पर असर संभव

महंगे उर्वरक आयात की स्थिति में सरकार को किसानों को दी जाने वाली सब्सिडी बढ़ानी पड़ सकती है। इससे वित्तीय दबाव भी बढ़ सकता है। सरकार अगले वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटे को घटाकर सकल घरेलू उत्पाद का 4.3 प्रतिशत करने का लक्ष्य रख रही है, जो इस साल के 4.4 प्रतिशत लक्ष्य से थोड़ा कम है। ऐसे में ईरान-इजरायल युद्ध से भारत में यूरिया उत्पादन घटा का असर आर्थिक मोर्चे पर भी महसूस किया जा सकता है।

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