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ईरान पर हमला के बाद क्या 150 डॉलर पहुंचेगा कच्चा तेल?

By Dainik Jan Times

Published on: March 1, 2026

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ईरान पर हमला के बाद क्या 150 डॉलर पहुंचेगा कच्चा तेल?

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ईरान पर हमला के बाद मध्य पूर्व में तनाव चरम पर पहुंच गया है और इसका सीधा असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ने की आशंका है। संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल द्वारा किए गए संयुक्त सैन्य अभियान ने ऊर्जा आपूर्ति की स्थिरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात और बिगड़े तो कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा जा सकता है।

ईरान पर हमला और होर्मुज जलडमरूमध्य का जोखिम

ईरान वैश्विक तेल उत्पादन का लगभग तीन प्रतिशत हिस्सा देता है और प्रतिदिन करीब 33 लाख बैरल कच्चा तेल उत्पादन करता है। हालांकि उत्पादन से अधिक महत्वपूर्ण उसकी भौगोलिक स्थिति है। ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य के किनारे स्थित है, जहां से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल गुजरता है।

यदि ईरान पर हमला के बाद इस समुद्री मार्ग में रुकावट आती है तो सऊदी अरब, इराक और अन्य खाड़ी देशों से होने वाली आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। रिपोर्ट्स के अनुसार कुछ तेल कंपनियों ने क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण शिपमेंट अस्थायी रूप से रोक दी है। प्रतिदिन लगभग दो करोड़ बैरल तेल और ईंधन इस मार्ग से गुजरता है, जिससे वैश्विक बाजार में किसी भी व्यवधान का व्यापक असर पड़ सकता है।

उत्पादन, निर्यात और संभावित संकट

प्रतिबंधों के बावजूद ईरान ने पिछले वर्षों में अपना उत्पादन दो मिलियन बैरल प्रतिदिन से बढ़ाकर 3.3 मिलियन बैरल प्रतिदिन कर लिया है। उसका अधिकांश निर्यात चीन को जाता है। खार्ग द्वीप ईरान का प्रमुख निर्यात टर्मिनल है, जहां हाल में विस्फोट की खबर आई, हालांकि तेल सुविधाओं को नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है।

ईरान पर हमला के बाद सबसे बड़ी चिंता यह है कि क्या ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाया गया है। यदि होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने जैसा कदम उठाया जाता है, तो यह वैश्विक बाजार के लिए सबसे खराब स्थिति होगी। हालांकि ईरान ने पहले कभी ऐसा कदम नहीं उठाया, लेकिन उसने इसे अपनी क्षमता में बताया है।

विश्लेषकों के अनुसार, सऊदी अरब और यूएई के पास पाइपलाइन के जरिए कुछ आपूर्ति मोड़ने की क्षमता है, परंतु जलडमरूमध्य का पूर्ण अवरोध कच्चे तेल की कीमतों को रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचा सकता है।

ईरान पर हमला से पैदा हुई अनिश्चितता ने ऊर्जा कंपनियों और निवेशकों को सतर्क कर दिया है। बाजार खुलने के बाद कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। फिलहाल दुनिया की नजरें मध्य पूर्व की स्थिति और तेल आपूर्ति पर संभावित प्रभाव पर टिकी हैं।

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